नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। सार्वजनिक परिवहन और गैर मोटर चालित परिवहन का उपयोग बढ़ाकर दिल्ली में ऑटोमोबाइल की विस्फोटक वृद्धि पर रोक लगाई जानी चाहिए। उच्च पार्किं ग शुल्क और भीड़-भाड़ कर लगाकर निजी वाहनों को निरुत्साहित किया जाना चाहिए। यह बात एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति ने कही है।
दिल्ली की सड़कों को जाम से मुक्ति दिलाने के उपाय बताने के लिए केंद्रीय नगर विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने अक्टूबर 2014 में एक समिति का गठन किया था।
समिति ने अपनी 126 पृष्ठों की रपट में शहर में जाम के कारणों और उसके प्रभावों का विश्लेषण किया है और आगे के उपायों के बारे में सुझाव दिए हैं।
समिति के अध्यक्ष नगर विकास सचिव राजीव गावा हैं। समिति के अनुसार, शहर के 21 प्रतिशत भाग में सड़क नेटवर्क के विस्तार की सीमित संभावनाएं हैं।
रपट में कहा गया है कि सड़क चौड़ीकरण और फ्लाईओवरों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हुए ऑटोमोबाइल केंद्रित योजना ने सिर्फ निजी वाहनों के उपयोग में वृद्धि को बढ़ावा दिया है। निजी वाहन शहर की सिर्फ 20 प्रतिशत परिवहन जरूरतें पूरी करते हैं।
समिति ने शहर में सड़क किनारे डेरा जमाने वाले समुदायों के कुकुरमुत्ते की तरह हो रही वृद्धि पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। ये लोग स्थानीय वाहनों को छोटे मार्ग अपनाने से रोकते हैं और मुख्य मार्ग पर आने को बाध्य करते हैं।
रपट में पैदल चलने वालों और साइकिल की सवारी करने वालों के लिए शहर में आवश्यक आधारभूत संरचना के विकास की काफी मजबूती से अनुशंसा की गई है।
अगले पांच साल में शहर के कुल परिवहन में सार्वजनिक परिवहन और गैर मोटर चालित परिवहन की 80 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए समिति ने कई हस्तक्षेपों की मांग की है।
आकलन के अनुसार, 2021 में शहर में प्रतिदिन कुल 2.8 करोड़ यात्री सफर करेंगे, जबकि 1981 में 45 लाख, 2001 में 1.18 करोड़ और 2008 में 1.44 करोड़ लोग प्रतिदिन सफर कर रहे थे।
समिति में 19 मंत्रालयों और एजेंसियों, दिल्ली पुलिस और शहरी निकायों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
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