नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। दिल्ली की एक अदालत ने कथित फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार किए गए दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की जमानत याचिका पर सुनवाई गुरुवार को 16 जून तक के लिए टाल दी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव जैन ने मामले के जांच अधिकारी के दिल्ली से बाहर होने और मामले की प्रगति रिपोर्ट तथा संबंधित दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण जमानत याचिका पर सुनवाई टाल दी। जांच अधिकारी फिलहाल तोमर के साथ हैं, जिन्हें पुलिस पूछताछ के लिए दिल्ली से बाहर ले गई है।
न्यायाधीश ने कहा, “पुलिस रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद जमानत याचिका पर निर्णय लेना सभी पक्षों के हित में है। जमानत अर्जी 16 जून को अदालत में पेश की जाए।”
न्यायाधीश ने कहा, “अंतरिम जमानत के आदेश मामले को आगे पेचीदा बनाएंगे और यह चीज न तो सही है और न ही वांछनीय।”
अदालत ने जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अपने समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है।
एक दंडाधिकारी ने मंगलवार को फर्जी डिग्री मामले में तोमर की गिरफ्तारी के बाद उन्हें चार दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया था। अदालत ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी।
दिल्ली पुलिस ने तोमर को मंगलवार को गिरफ्तार किया था और उन पर धोखाधड़ी, जालसाजी एवं साजिश का मामला दर्ज किया था।
पुलिस ने तोमर की पुलिस हिरासत की मांग करते हुए अदालत को बताया था कि मामले की जांच शुरुआती चरण में है और तोमर की कानून डिग्री से संबंधित दस्तावेज ‘फर्जी’ हैं।
वहीं, तोमर के वकील एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता ने तोमर को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजने वाले मजिस्ट्रेटी अदालत के आदेश को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी अवैध है।
अधिवक्ता ने सत्र न्यायाधीश की ओर से मजिस्ट्रेटी अदालत के आदेश के खिलाफ एक नई याचिका फाइल करने की इजाजत मिलने के बाद गुरुवार को अपनी याचिका वापस ले ली।
अधिवक्ता ने जमानत के लिए जिरह करते हुए अदालत से तोमर की नियमित जमानत का अंतिम फैसला होने तक उन्हें अंतरिम जमानत देने की दरख्वास्त की। उन्होंने दावा किया कि उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फंसाया गया है।
उन्होंने तोमर की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली पुलिस की हड़बड़ी पर सवाल उठाए। अधिवक्ता ने कहा, “तोमर की गिरफ्तारी को लेकर इतनी हड़बड़ी क्यों थी? पुलिस उन्हें उठाकर ले गई, ताकि वह अग्रिम जमानत न ले सकें।”
उधर, दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) चाहती है कि ऐसे ही मामले में फंसीं केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी और मानव संसाधन राज्यमंत्री रामशंकर कठेरिया को भी जल्द गिरफ्तार किया जाए, वरना यह धारणा झूठी पड़ जाएगी कि कानून सबके लिए बराबर होता है।
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