नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। केंद्र व दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लगभग 25 हजार रेजिडेंट डॉक्टर गैर प्रैक्टिस भत्ते (एनपीए) को बेसिक वेतनमान में जोड़ने की मांग को लेकर गुरुवार को एक दिन की हड़ताल पर चले गए।
कथित तौर पर डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण समय पर इलाज न मिलने से लोक नायक जय प्रकाश नारायण (एलएनजेपीएन) अस्पताल में एक बुजुर्ग महिला मरीज की मौत हो गई।
पूरी दिल्ली के रेजिडेंट डॉक्टर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के खिलाफ गैर प्रैक्टिस भत्ते को बेसिक वेतनमान के साथ जोड़ने की मांग कर रहे हैं।
सफदरजंग अस्पताल, लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल, राम मनोहर लोहिया अस्पताल तथा दिल्ली सरकार के अन्य अस्पतालों के डॉक्टर गुरुवार को लेडी हार्डिग अस्पताल में इकट्ठा हुए और जंतर मंतर तक एक विरोध मार्च निकाला।
फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (एफओआरडीए) के अध्यक्ष पंकज सोलंकी ने आईएएनएस से कहा, “बेसिक वेतनमान में एनपीए को शामिल करने की अपनी मांग को लेकर अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए हमने एक दिन की टोकन हड़ताल का आह्वान किया है। इससे पहले एनपीए बेसिक वेतनमान में शामिल था, लेकिन सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के बाद इसे बेसिक वेतनमान से अलग कर दिया गया।”
उन्होंने कहा, “हमने इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आज केवल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के रेजिडेंट चिकित्सकों को छोड़कर दिल्ली में सभी सरकारी अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर हैं।”
अर्थराइटिस व सांस संबंधी बीमारी से जूझ रही सपरा बेगम (70) को सुबह 11 बजे लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल के आपातकाल विभाग में लाया गया था, लेकिन कथित तौर पर समय पर उनका इलाज न होने के कारण उनकी मौत हो गई।
पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर निवासी उनके बेटे शब्बीर ने कहा, “मेरी मां की हालत बेहद खराब थी। हम उन्हें लेकर आज सुबह लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल के आपातकाल विभाग में पहुंचे। हमें कहा गया कि हड़ताल के कारण यहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं है और हमें एम्स चले जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में दो घंटे तक इंतजार करने के बाद उन्होंने मेरी मां को एक इंजेक्शन दिया, जिसके बाद वे उल्टी करने लगीं और 15 मिनट के अंदर उनकी मौत हो गई।”
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