नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली मेट्रो के भीतर 10 साल का संदीप कुमार लगभग एक साल से खिलौने और अन्य वस्तुएं बेचता आ रहा है। एक बच्चा, जिसे पैसों की जरूरत हो, उसके द्वारा ऐसा किया जाना हानिकारक नहीं प्रतीत होता, लेकिन इस तरह के मामलों के तेजी से बढ़ने पर अधिकारियों के लिए इस पर काबू पाना मुश्किल हो सकता है।
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली मेट्रो के भीतर 10 साल का संदीप कुमार लगभग एक साल से खिलौने और अन्य वस्तुएं बेचता आ रहा है। एक बच्चा, जिसे पैसों की जरूरत हो, उसके द्वारा ऐसा किया जाना हानिकारक नहीं प्रतीत होता, लेकिन इस तरह के मामलों के तेजी से बढ़ने पर अधिकारियों के लिए इस पर काबू पाना मुश्किल हो सकता है।
ऐसा संभव है कि किसी ने उसे व अन्य को मेट्रो ट्रेनों के भीतर सस्ती चीजें बेचने के लिए रखा हो।
जब आईएएनएस ने दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन (डीएमआरसी) से संपर्क करना चाहा तो उन्होंने बहाना बनाकर इसे नजरअंदाज कर दिया।
दिल्ली मेट्रो के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “ऐसे कृत्य दिल्ली मेट्रो ऑपरेश्न एंड मेंटेनेंस एक्ट के तहत दंडनीय हैं। इस तरह की घटनाएं सामने आने पर उपधाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
जब संदीप को पैसों की कमी होती है तो वह एक काली पोलीथिन में खिलौनों और अन्य वस्तुओं को बदन में बांधकर मेट्रो में चढ़ता है और अपना व्यापार करता है।
ज्यादातर दिनों में वह बिना टोकन के मेट्रो में चढ़ता है। उसका बहाना होता है, पैसे नहीं हैं। उसने आईएएनएस से कहा, “जब मेरे पास टोकन खरीदने के पैसे होते हैं तो मैं एक टोकन खरीदता हूं। नहीं तो, मैं बिना टोकन के ही स्टेशन में प्रवेश करता हूं।”
उसने कहा कि उसे मालूम है कि बिना उचित दस्तावेज और इजाजत के ट्रेन या स्टेशन पर सामान बेचना अवैध है, लेकिन उसे हफ्तेभर जिंदा रहने के लिए ऐसा करना पड़ता है।
उसने बताया, “बाजार में कोई मुझसे यह चीजें नहीं खरीदता और मैं मेट्रो में ज्यादा पैसे कमा लेता हूं।”
उसने कहा, “दूसरों की तरह मैं भी पैसे कमाने के लिए बहुत मेहनत करता हूं, हर कोई सड़क पर केवल भीख ही मांग रहा है।”
यह पूछने पर कि दिन में कितना कमा लेते हो, उसने कहा, “मैं सदर बाजार से खिलौने खरीदता हूं और उन्हें 20 और 30 रुपये में बेचता हूं। एक दिन में मैं करीब 200 रुपये या कभी कभार उससे ज्यादा कमा लेता हूं।”
संदीप पश्चिमी दिल्ली के रघुबीर नगर में एक छोटे से कमरे में अकेला रहता है। उसने कहा, “मेरे पिता बेंगलुरू में एक मजूदर हैं। मेरी मां और छोटा भाई गांव में रहते हैं। इसलिए मुझे खाना खरीदने के लिए पैसे कमाने पड़ते हैं।”
वह अक्सर राजौरी गार्डन से मेट्रो पकड़ता है और ब्लू लाइन (द्वारका सेक्टर 21-नोएडा सिटी सेंटर) या पिंक लाइन (मजलिस पार्क-लाजपत नगर) पर खिलौने बेचता दिखाई दे जाता है।
सीसीटीवी कैमरों और अधिकारियों से बचने के लिए संदीप ज्यादा चौकन्ना रहता है और बार बार ट्रेनें बदलता रहता है।
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