नई दिल्ली, 11 जनवरी (आईएएनएस)। इस वर्ष नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले की थीम ‘भारत की सांस्कृतिक धरोहर’ है। हॉल नंबर 7 स्थित थीम पैवेलियन में भारतीय संस्कृति को आकार देने वाले विषयों- जैसे दर्शन, ज्ञान, परंपरा तथा बहुभाषीय साहित्यिक प्रथाओं की झलक प्रस्तुत की जा रही है।
मेले में लगी प्रदर्शनी को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वह भारत की सांस्कृतिक विरासत के दिग्दर्शन करवाती नजर आती है। थीम मंडप में विभिन्न भारतीय भाषाओं में भारतीय कला, संस्कृति, संगीत, नृत्य, दर्शन आदि विषयों पर आधारित 800 से अधिक पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया है। मंडप में रामायण तथा अथर्ववेद जैसी प्राचीन पांडुलिपियों को भी प्रदर्शित किया गया।
थीम मंडप पर प्रतिदिन अनेक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। सोमवार को मंडप पर संस्कृत के माध्यम से विज्ञान विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने संस्कृत ग्रंथों में उल्लिखित प्राचीन काल में हुए वैज्ञानिक विकास पर विचार साझा किए।
मेले में प्रकाशकों के लिए दो दिवसीय बी2बी कार्यक्रम, प्रतिलिप्याधिकार मंच (राइट्स टेबल) का आयोजन 11 से 12 जनवरी तक किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में भारत सहित मिस्र, नेपाल, चीन, मलेशिया, इंडोनेशिया आदि देशों से आए 60 से अधिक प्रकाशक भाग ले रहे हैं।
अतिथियों का स्वागत करते हुए एनबीटी के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि यह प्रतिलिप्याधिकार मंच प्रकाशकों को एक ही स्थान पर परस्पर मिलने का अवसर प्रदान करता है। कार्यक्रम में एनबीटी की निदेशक डॉ. रीता चौधरी भी उपस्थित थीं।
बाल मंडप :
पुस्तक मेले में बने बाल मंडप में बच्चों के लिए विभिन्न बाल गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जो हर आयुवर्ग के पुस्तक प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। सोमवार को इस मंडप पर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा प्रख्यात असमिया लेखिका, बंदिता फुकन के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। बंदिता फुकन असम की प्रथम मैकेनिकल इंजीनियर हैं और उन्होंने बच्चों को पौराणिक पात्रों पर आधारित कहानी सुनाई।
लोकार्पण :
पुस्तक मेले में अनेक पुस्तकों का लोकार्पण हुआ, जिनमें शामिल हैं : विश्व हिंदी साहित्य परिषद, दिल्ली द्वारा प्रकाशित ‘बियोंड न्यूज’, सामयिक प्रकाशन की ‘मिलजुल मन’ तथा ‘कुइयां जान’, साहित्य निकेतन, बिजनौर द्वारा प्रकाशित ‘कुछ अपनी कुछ जग बीती’, ‘हिंदी कहानी के नए प्रतिमान’, ‘सफर में साथ’, ‘एक इंद्रधनुषी व्यक्तित्व’, बाल कृष्ण के ‘बाल गीत’ और ‘औरत की जंग’।
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