कटनी, 6 अगस्त (आईएएनएस)। वे हैं तो दिहाड़ी कामगार, मगर बैंक खातों में वे कंपनियों के निदेशक हैं और उनके खातों से करोड़ों रुपयों का लेन-देन हुआ है। यह खुलासा तब हुआ, जब आयकर विभाग का नोटिस उन तक पहुंचा।
कोतवाली थाने के प्रभारी एस. पी. एस. बघेल ने शनिवार को आईएएनएस से कहा कि संबंधित व्यक्तियों की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर लिया गया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
बघेल के अनुसार, कटनी जिले में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले दो दिहाड़ी मजदूरों को कंपनियों का निदेशक बनाकर करोड़ों रुपयों का लेन-देन किया गया है। इन बैंक खातों से देश के विभिन्न स्थानों पर राशि का आहरण किया गया है।
उन्होंने कहा, “रजनीश तिवारी पेशे से इलेक्ट्रीशियन हैं और रोजाना लगभग 200 रुपये कमाते हैं। मगर एक बैंक में उनके नाम का एक खाता है, जिसमें वह एक कंपनी के निदेशक हैं। इस खाते से वर्ष 2006 से 2010 की अवधि में लगभग 16़ 93 करोड़ रुपयों का लेन-देन हुआ है। उन्हें इस बात का पता तब चला, जब उन्हें आयकर विभाग का नोटिस मिला। नोटिस आय का ब्यौरा न देने के लिए मिला है। नोटिस में आय का स्रोत पूछा गया है।”
बघेल ने कहा, “इसी तरह एक निजी क्लीनिक में बतौर प्रयोगशाला सहायक काम करने वाले उमा दत्त हलदकार का भी एक बैंक में खाता है। इस खाते के मुताबिक वह भी एक कंपनी के निदेशक हैं। इस खाते से लगभग दो करोड़ 27 लाख रुपये का लेन-देन हुआ है।”
उन्होंने कहा कि इन दोनों व्यक्तियों को जब आयकर विभाग का नोटिस मिला तो वे भौंचक रह गए और उन्होंने कोतवाली थाने में लिखित आवेदन किया कि वे किसी कंपनी के निदेशक नहीं हैं, बल्कि दिहाड़ी मजदूर के तौर पर अपना जीवन चला रहे हैं।
बघेल ने कहा कि दोनों ने शिकायत में कहा है कि उन्हें पता ही नहीं है कि वे किसी कंपनी के निदेशक हैं, उन्हें न तो खातों की जानकारी है और उन्होंने लेन-देन ही की है।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस को इस फर्जीवाड़े में हवाला की आशंका है, क्योंकि इन दोनों दिहाड़ियों के नाम पर राशि का आहरण देश के विभिन्न हिस्सों में किया गया है।
महाकौशल क्षेत्र का कटनी जिला उन इलाकों में से है, जहां बड़े पैमाने पर खनिज खदानें हैं और अवैध खनन का कारोबार भी जोरों पर चलता है। इस नए खुलासे ने यहां चल रहे फर्जीवाड़े की तरफ भी इशारा किया है।
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