दूरदर्शी थे हैदराबाद के निजाम : प्रणब मुखर्जी

हैदराबाद, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उस्मानिया विश्वविद्यालय की स्थापना करने वाले हैदराबाद के अंतिम निजाम मीर उस्मान अली खान को बुधवार को दूरदर्शी करार दिया।

विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि निजाम का सपना हैदराबाद में उच्च शिक्षा के लिए एक विश्वस्तरीय संस्थान की स्थापना करने का था।

तीन दिवसीय समारोह की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा, “ठीक 100 साल पहले आज ही के दिन अंतिम निजाम दूरदर्शी मीर उस्मान अली खान ने हैदराबाद में विश्वस्तरीय संस्थान की स्थापना की सपना देखा था।”

उन्होंने कहा कि इन 100 वर्षो के अंतराल में विश्वविद्यालय ने कई उतार-चढ़ाव देखे, जिसमें दो विश्वयुद्ध तथा भारत की आजादी तथा तेलंगाना का गठन भी शामिल है।

राष्ट्रपति ने उस्मानिया विश्वविद्यालय की स्थापना करते हुए सपना देखा था कि यह एक ऐसी जगह होगी, जहां स्वतंत्र विचार के लोग मिलेंगे, स्वतंत्र रूप से विचारों का आदान-प्रदान होगा और वे साथ मिलकर शांतिपूर्वक रहेंगे।

उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि भारतीय विश्वविद्यालय बुनियादी शोध तथा नवाचार में पिछड़ते जा रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा, “हम शिक्षा में उत्कृष्टता तबतक हासिल नहीं कर सकते, जबतक बुनियादी शोध व नवाचार को नजरअंदाज किया जाता रहेगा। मैं इसके लिए केवल शैक्षणिक संस्थानों को जिम्मेदार नहीं ठहराता हूं, क्योंकि इसके लिए निर्बाध कोष की जरूरत होती है, जो या तो सरकार से मिलती है या फिर उद्योगों से।”

उन्होंने कहा कि जितने कोष की जरूरत होती है, उसकी पूर्ति राज्य सरकार के माध्यम से नहीं हो सकती, इसलिए उद्योगों को आगे आना चाहिए और उद्योग तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच एक अंतराफलक (इंटरफेस) होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा, “हमें अपने विश्वविद्यालयों को एक मॉडल के रूप में, आधुनिक शिक्षा के मंदिर के रूप में विकसित करना होगा, जहां पूरी दुनिया से शिक्षक तथा छात्र पठन-पाठन के लिए आएं।”

उन्होंने इशारा करते हुए कहा कि 1,500-1,600 साल पहले भारत की उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में महत्पूर्ण भूमिका थी।

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