धर्म-धम्म सम्मेलन विविधताओं में समानता बढ़ाने का अवसर : राष्ट्रपति (लीड-1)

राजगीर (बिहार), 11 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यहां गुरुवार को कहा कि धर्म-धम्म सम्मेलन विविध परंपराओं में समानता और समझ बढ़ाने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि आसियान-भारत वार्ता भागीदारी की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह सम्मेलन आयोजित है, बल्कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर 10 आसियान देश के नेता भी शिरकत करेंगे।

इससे पहले राष्ट्रपति ने राजगीर स्थित अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन हॉल में धर्म-धम्म सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन में 11 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि नालंदा धरोहरों की धरती रही है। ऐसे आयोजनों से देश के मित्र राष्ट्रों के संबंधों में और मजबूती आएगी। उन्होंने कहा, “यह सम्मेलन धर्म और धम्म की विविध परंपराओं की समान जड़ें और समानता की समझ को बढ़ाने का एक प्रयास है।”

राष्ट्रपति ने कहा कि यह अनुमान लगाया गया है कि दुनिया की वर्तमान आबादी पर वहां के ऐतिहासिक प्रभाव पड़े हैं और वहां की परंपराओं को भी इतिहास प्रभावित करता है।

इससे पहले, राष्ट्रपति एक दिवसीय बिहार यात्रा पर गया पहुंचे। गया हवाईअड्डे पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनका स्वागत किया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर को भी ऐतिहासिक धरोहर घोषित करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि राजगीर भी ऐतिहासिक स्थल है। यह क्षेत्र न केवल महात्मा बुद्ध और महावीर से जुड़ा है, बल्कि महाभारत काल के पांडु और जरासंध की भी यह धरती रही है।

उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा नालंदा विश्वविद्यालय का संचालन अपने भवन में जल्द से जल्द प्रारंभ कराने का है।

तीन दिनों तक नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में चलने वाले इस सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर बिहार के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इस मौके पर श्रीलंका के विदेश मंत्री तिलक मारापना विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। नालंदा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुनैना सिंह ने राष्ट्रपति को बुके और मोमेंटो देकर अतिथियों का स्वागत किया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य धार्मिक परंपरा को जागृत करना है, क्योंकि ‘धम्म’ शांति का एक प्रमुख स्रोत है।

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