नई दूरसंचार नीति संपर्क संचालित के बजाय आवेदन संचालित होगी : मनोज सिन्हा (लीड-1)

नई दिल्ली, 12 जुलाई (आईएएनएस)। संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने बुधवार को कहा कि उनका मंत्रालय नई दूरसंचार नीति पर कार्य कर रहा है जो संपर्क संचालित राष्ट्रीय दूरसंचार नीति 2012 की तुलना में आवेदन संचालित होगी।

यहां एक सम्मेललन में ‘आईसीटी : नई शासन संरचना तैयार करना’ विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि नई नीति में अंतिम उपयोगकर्ता पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए और दूरसंचार सेवाओं का विस्तार करने के लिए नए अवसरों की तलाश की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि उच्च गति की डाटा सेवाओं के आगमन और उपभोक्ताओं की बढ़ती उम्मीदों के चलते वास्तविक समय में लाईव आवेदन के लिए बैंडविड्थ की मांग के कारण नई नीतियां तैयार की गई हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने नई नीति के लिए पहली बार नागरिकों और हितधारकों से अधिक जानकारी लेने के लिए अपने विभाग के बाहर से बड़ी संख्या में विशेषज्ञों को शामिल करने का निर्णय लिया।

मंत्री ने कहा कि बढ़ते ज्ञान संचालित विश्व में सामाजिक, आर्थिक विकास के लिए आवश्यक बुनियादी ढा़चे में संचार क्षेत्र का विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2017 तक देश में 1.17 अरब वायरलेस टेलीफोन कनेक्शन सहित लगभग 1.2 अरब टेलिफोन कनेक्शन थे। इसी प्रकार ब्रॉडबैंड कनेक्शन में भी तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है जो अब 27.65 करोड़ है।

सिन्हा ने कहा कि हमारे सेवा प्रदाता तेजी से 4जी प्रौद्योगिकी लगा रहे हैं ऐसे में उनका ध्यान दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर है। पहला पूर्वोत्तर और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों सहित सभी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी का आवश्यक विस्तार करने पर और दूसरा भविष्य की 5जी प्रौद्योगिकी पर नजर रखना, मानक विकसित करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करना और 5जी प्रौद्योगिकी में नवाचार तथा पेटेंट में बेहतर हिस्सा प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2016 से मार्च 2017 तक दूरसंचार क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 55.64 अरब डॉलर था, जो 2013-14 से प्रति वर्ष औसत 1.3 अरब डॉलर से चार गुना अधिक है।

मंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए कनेक्टेविटी पहली आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 19वीं और 20वीं सदी में विकास के लिए सड़क बुनियादी ढांचा जरूरी था लेकिन 21वीं सदी में प्रगति के लिए सूचना सुपर हाइवे अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इंडियन टेलीग्राफ राइट ऑफ वे रूल्स, 2016 में केबल बिछाने की मंजूरी प्रक्रिया को और सरल बनाना तथा दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए कारोबार करने में सुगमता लाने में मदद करना अधिसूचित किया गया है।

उन्होंने जानकारी दी कि दूरसंचार विभाग ने पिछले सप्ताह, “केन्द्रीय उपकरण पहचान पंजीकरण की घोषणा की है। इससे अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान (आईएमइआई) आधारित उपकरण पंजीकरण तथा प्रमाणन के लिए मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे मोबाइल फोन की चोरी के मामले निपटाने में काफी मदद मिलेगी। विभाग दूरसंचार उपभोक्ता शिकायतों के निपटान के लिए ट्राई की सिफारिशों पर भी विचार कर रहा है। विभाग ने अधिकारियों से आधुनिक प्रौद्योगिकी संचालित समाधान के लिए सुझाव देने को कहा है।”

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