नई दिल्ली।, 31 जनवरी (आईएएनएस)। एक सर्वेक्षण के अनुसार नकली उत्पादों की वजह से हर साल विश्वस्तर पर होने वाला नुकसान 700 अरब डॉलर के बराबर है, जिसके कारण ब्रांड बाजार में अपनी हिस्सेदारी का 20 फीसदी खो देते हैं और कंपनियों को मुनाफे पर लगभग 10 प्रतिशत घाटे का सामना करना पड़ता है। इसलिए सरकार को इस पर नियंत्रण करने की जरूरत है।
मैसे फ्रैंकफर्ट इंडिया के कार्यकारी निदेशक राज मानिक ने यहां कहा कि आगामी बजट के साथ जो सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाने की जरूरत है, वह है नकली उत्पादों की वजह से हुए घाटे को घटाना, जिसका सबसे ज्यादा शिकार ऑटो, फार्मा, एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि क्षेत्र हैं। हर साल सरकार जालसाजी, सिगरेट और पान मसाला जैसे उत्पाद पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क की चोरी व लघुचोरी के कारण अपना राजस्व खो देती है।
उद्योग संगठन फिक्की की कैस्केड स्टडी ‘इनविजिबल एनिमी’ में भारत में सात उद्योग क्षेत्रों के लिए अवैध व्यापार के आकार का अनुमान लगाया गया है, जिसमें ऑटो, अल्कोहल, कंप्यूटर हार्डवेयर, एफएमसीजी, मोबाइल फोन और तंबाकू उद्योग शामिल हैं।
ऑथेंटिकेशन सोल्यूशन प्रोवाइडर एसोसिएशन के अध्यक्ष यू.के. गुप्ता के अनुसार, “हमारी इंडस्ट्री इन समस्याओं को जड़ से उखाड़ने मंे सरकार की मदद कर सकती है। एक ब्रांड का मालिक जो एक ऑथेंटिकेशन सोल्यूशन को एंप्लाय करता है। जालसाज की हिस्सेदारी में कटौती करके अपने व्यापार को बढ़ा सकता है। यह बढ़ता व्यापार करों और शुल्कों का अधिक संग्रह करके राजकोष में अधिक राजस्व लाएगा। नकली उत्पादों से अर्जित पैसे को अक्सर अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक गतिविधियों की फंडिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए नकली उत्पादों में कमी करने से इस तरह के आपराधिक गतिविधियों को कम करने में बढ़ावा मिलेगा।”
राज मानिक के अनुसार, “हम उन नीतियों के लिए तत्पर हैं, जो बुनियादी ढांचे में सुधार और व्यवसाय करने की सुविधा को सक्षम करने के लिए तैयार की जाएगी। भारत में निवेश पर विचार कर रहे अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण पहलू हैं। विशेष रूप से मोटर वाहन, ऊर्जा और कपड़ा जैसे उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में। इसके अलावा आने वाले वर्षो में ‘मेड इन इंडिया’ पर सरकार का ध्यान सभी सेक्टरों में नकली उत्पादों पर अंकुश लगाने की नीतियों के साथ समर्थित होना चाहिए, जो राजस्व पर भी प्रभाव डालता है। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करना है कि इन उत्पादों का लेबल ‘मेड इन इंडिया’ वास्तविक और सुरक्षित व संरक्षित है।”
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