नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा ने शुक्रवार को यहां प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) का शुभारंभ किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) का उद्देश्य सुरक्षित गर्भावस्था और सुरक्षित प्रसव के जरिए मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दरों को कम करना है। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम के जरिए देश भर में लगभग 3 करोड़ गर्भवती महिलाओं को विशेष मुफ्त प्रसव पूर्व देखभाल मुहैया कराई जाएगी, ताकि उच्च जोखिम वाले गर्भधारण का पता लगाने के साथ-साथ इसकी रोकथाम की जा सके।
नड्डा ने कहा कि इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के तहत हर महीने 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं को सुनिश्चित, व्यापक एवं उच्च गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व देखभाल मुहैया कराई जाएगी। नड्डा ने कहा कि गर्भवती महिलाएं अब सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर अपनी दूसरी या तीसरी तिमाही में स्त्री रोग विशेषज्ञों/चिकित्सकों द्वारा मुहैया कराए जाने वाले विशेष प्रसव पूर्व चेक-अप का लाभ उठा सकती हैं। यह सुविधा निजी क्षेत्र के डॉक्टरों के सहयोग से मुहैया कराई जाएगी, जो सरकारी क्षेत्र के प्रयासों के पूरक के तौर पर उपलब्ध होगा।
ग्रामीण एवं शहरी दोनों ही क्षेत्रों में चिन्हित स्वास्थ्य सेवा केंद्रों पर सामान्य प्रसव पूर्व चेक-अप के अलावा अल्ट्रासाउंड, रक्त और मूत्र परीक्षण सहित इन सेवाओं को उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसका एक उद्देश्य उच्च जोखिम वाले गर्भधारण का पता लगाना और इस दिशा में समुचित कदम उठाना है, ताकि एमएमआर और आईएमआर में कमी संभव हो सके।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवा में सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में काम करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में अनेक सूचकांकों के बारे में महत्वपूर्ण प्रगति की है और देश में नवजात शिशु मृत्यु दर (आईएमआर), मातृ मृत्यु दर (एमएमआर), कुल प्रजनन दर (टीएफआर) जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकेतकों में पर्याप्त प्रगति की है और देश में पांच मृत्यु दरों के अधीन विश्व की तुलना में तेजी से गिरावट आई है। नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत मंत्रालय का उद्देश्य इसे आगे बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और कवरेज में सुधार लाना है।
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