नर्मदा सेवा यात्रा प्रकृति के साथ संतुलन का प्रयास : शिवराज

भोपाल, 24 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा प्रकृति के साथ संतुलन बनाने का प्रयास है। यह नदी को स्वच्छ बनाने की दिशा में किए जाने वाले प्रयासों का हिस्सा है।

शिवराज ने यहां विज्ञान एवं पर्यावरण पत्रिका ‘डाउन टू अर्थ’ के हिन्दी संस्करण के विमोचन कार्यक्रम में कहा, “दुनिया को बचाने के लिए प्रकृति के साथ छेड़छाड़ बंद करनी होगी। नर्मदा सेवा यात्रा प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर दुनिया को बचाने के प्रयास का हिस्सा है।”

उन्होंने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा अलग-अलग दृष्टिकोण से नदियों के संरक्षण के प्रति सक्रिय व्यक्तियों, संस्थाओं और संगठनों को एक मंच प्रदान करने की कोशिश है। इसके जरिये पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों, सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं, साहित्यकारों, कलाकारों, आस्था, विश्वास, श्रद्घा रखने वालों को नदी संरक्षण के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।

चौहान ने नर्मदा नदी संरक्षण के लिए फलदार पेड़ लगवाने, विसर्जन कुंड, मुक्तिधाम, ट्रीटमेंट प्लांट, शौचालय बनवाने के कार्यो की जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा से सामाजिक सोच में परिवर्तन आया है। पूजन-पद्धति में बदलाव की प्रभावी कोशिशें हो रही हैं। प्रदेश में एक अप्रैल से नर्मदा तट के दोनों ओर शराब की दुकानें बंद हो जाएंगी। क्षिप्रा, ताप्ती और बेतवा नदी के संरक्षण का कार्य भी करवाया जाएगा।

‘डाउन टू अर्थ’ की संपादक और पर्यावरण के लिए काम करने वाली दिल्ली स्थित संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा, “समाज को जितनी आवश्यकता नदी के जल की है, उतनी ही आवश्यकता नदियों को भी समाज के सहयोग की है। प्रदेश में नर्मदा नदी संरक्षण की समय रहते पहल शुरू हो गई है। नदी निरंतर बहती रहेगी, अविरल रहेगी।”

उन्होंने कहा कि सामान्यत: पर्यावरण बचाने की कोशिशें तब शुरू की जाती हैं, जब तबाही हो चुकी होती है। नर्मदा नदी के साथ ऐसा नहीं है।

इस अवसर पर उन्होंने ‘डाउन टू अर्थ’ पत्रिका के हिन्दी संस्करण और प्रकाशन के उद्देश्यों पर भी प्रकाश डाला।

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