मॉस्को, 21 जून (आईएएनएस)। रूस के आर्थिक मंत्री का कहना है कि रूस सरकार निवेश को प्रोत्साहित करने और उसके परस्पर संरक्षण के लिए अंतर सरकारी समझौते के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में है।
मॉस्को, 21 जून (आईएएनएस)। रूस के आर्थिक मंत्री का कहना है कि रूस सरकार निवेश को प्रोत्साहित करने और उसके परस्पर संरक्षण के लिए अंतर सरकारी समझौते के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में है।
रूस एंड इंडिया रिपोर्ट (आरआईआर) ने रूस के आर्थिक विकास मंत्री एलेक्सी उलयुकाएव के साथ इस बारे में और रूस-भारत व्यापारिक संबंधों में अन्य घटनाक्रमों के बारे में बातचीत की। इसमें द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौते में सुधार का मुद्दा भी शामिल हैं।
पेश है साक्षात्कार के खास अंश –
आरआईआर : भारत और रूस के बीच 2014 में और 2015 के शुरुआती महीनों में किस तरह व्यापार सफल हुआ। क्या माल की संख्या बढ़ी? किन कारकों ने द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित किया?
उलयुकाएव : दोनों देशों के बीच पिछले कुछ सालों में व्यापार 10 अरब डॉलर के स्तर पर रहा है। पिछले साल यह 9.5 अरब डॉलर था। रूस से भारत को किया गया निर्यात लगभग 6.3 अरब डॉलर रहा, जबकि भारत से किया गया आयात 3.2 अरब डॉलर था। 2015 के प्रथम चार महीनों में द्विपक्षीय व्यापार 2.5 अरब डॉलर था, जिसमें पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 17.1 प्रतिशत की कमी रही है।
रूस-भारत व्यापार को प्रभावित करने वाले नकारात्मक कारक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रूबल की अस्थिर विनिमय दर रही। इसके साथ ही रूस व्यापार में रूस की आपूर्ति से जुड़ी अनियमितताएं और रूस के घरेलू बाजार में मांग में कमी भी इसके प्रमुख कारकों में से एक है।
आरआईआर : क्या आपने पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर पाबंदियां लगाने के बाद रूस-भारत व्यापार में कोई बदलाव देखा है? क्या भारतीय साझेदारों के साथ बातचीत करना रूस के लिए अधिक जटिल हो गया है? यदि हां, तो यह किसके साथ जुड़ा है?
उलयुकाएव : हमारे संबंधों में कारोबारी संबंध सहित विश्वास के परंपरागत माहौल में कोई बदलाव नहीं आया है। हमारे भारतीय साथी दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने के प्रति आश्वस्त हैं। वे लंबी अवधि के दोस्त और भागीदार के रूप में रूस की मदद करने को तैयार हैं।
आरआईआर : रूस और भारत के बीच व्यापार और सहयोग को बढ़ाने के लिए आपको किन क्षेत्रों में संभावना दिखती है? इसे मजबूत करने के लिए रूस क्या कदम उठाएगा?
उलयुकाएव : भारतीय बाजार में रूस के वाहन, उपकरण, परिवहन, रासायनिक उत्पाद और उर्वरक, तेल एवं गैस, अर्ध कीमती और कीमती धातुएं, कोक और थर्मल कोक, खुदरा हीरे, सेम एवं सूरजमुखी तेल आदि क्षेत्रों में मांग है।
क्षेत्रीय और मध्यम श्रेणी के विमानों एवं असैन्य हेलीकॉप्टरों की मांग के साथ भारत में नागरिक उड्डयन क्षेत्र काफी प्रगतिशील क्षेत्र है। भारतीय बाजार में 100 सुखोई सुपरजेट यात्री विमानों की आपूर्ति की संभावना है और भविष्य में एमसी-21 और हेलीकॉप्टरों एमआई-172, का-226 की आपूर्ति की भी संभावना है।
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