कोलकाता, 27 दिसम्बर (आईएएनएस)। दो नाबालिग बालिकाओं द्वारा वंचित बच्चों की पढ़ाई के लिए बनाए गए पुस्तकालय का दरवाजा बुधवार को बच्चों के लिए खोल दिया गया। इस पुस्तकालय में एक हजार किताबें हैं, जिसे बच्चे निशुल्क पढ़ सकेंगे।
पुस्तकालय का यह विचार 12 साल की मनस्वी डूगर व नौ साल की सुहासिनी डूगर का था और बच्चियों के इस विचार को उनकी मां शीतल ने साकार करने में मदद की। रीडर्स प्लैनेट का मकसद सभी आयु वर्ग के बच्चों के लिए पढ़ाई को सुलभ बनाना है।
शीतल ने आईएएनएस से कहा, “मनस्वी और सुहासिनी बच्चों को किताबें बांटना चाहती थीं, जिनके पास पढ़ने के लिए किताबें नहीं थीं। लेकिन उन्हें एहसास हुआ कि वे सिर्फ कुछ बच्चों तक पहुंच सकती हैं। वंचित बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए हमने अपने घर में एक अध्ययन कक्ष बनाने का फैसला किया।”
दक्षिण मध्य कोलकाता के बालीगंज में 300 वर्गमीटर में स्थापित रीडर्स प्लैनेट में विज्ञान, इतिहास, भूगोल, सामान्य ज्ञान व अंग्रेजी व हिंदी के अलावा कहानियों की किताबें हैं।
यह सोमवार से शनिवार तक सुबह 11 बजे से शाम सात बजे तक खुला रहेगा और इसका इस्तेमाल मुफ्त होगा।
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