नायडू ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज किया (लीड-2)

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति एम.वेंकैया नायडू ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों के महाभियोग के नोटिस को सोमवार को खारिज कर दिया।

यह फैसला सर्वोच्च न्यायालय की दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले लिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा अधिकारियों ने नोटिस की समीक्षा करने के दौरान उल्लेख किया कि किसी भी नोटिस को सभापति के समक्ष पेश करने से पहले उसे सार्वजनिक करना संसदीय नियमों का उल्लंघन है।

राज्यसभा सदस्यों के लिए विवरण पुस्तिका के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी नोटिस को जब तक सभापति द्वारा स्वीकृत नहीं किया जाता, उसका प्रचार नहीं किया जाना चाहिए।

सभापति ने सुबह कांग्रेस और छह अन्य विपक्षी दलों द्वारा पेश किए गए महाभियोग के नोटिस पर कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों से विस्तार में चर्चा की।

वह अपना हैदराबाद दौरा बीच में ही छोड़कर रविवार को दिल्ली लौट आए क्योंकि वह जिन विशेषज्ञों से चर्चा करना चाहते थे, उनमें से कुछ रविवार को ही चर्चा के लिए उपलब्ध थे।

सभापति ने जिन लोगों से परामर्श किया, उनमें के.के.वेणुगोपाल और उनके पूर्ववत के.परासरन शामिल हैं।

उन्होंने पूर्व लोकसभा महासचिव सुभाष कश्यप, पूर्व विधि सचिव पी.के.मल्होत्रा और पूर्व विधायी सचिव संजय सिंह से बात की।

राज्यसभा के पूर्व महासचिव वी.के.अग्निहोत्री से भी विचार-विमर्श किया गया।

इसके अलावा नायडू ने राज्यसभा के वरिष्ठ अधिकारियों से भी चर्चा की। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी.एस.सुदर्शन रेड्डी से भी बात की।

कांग्रेस ने रविवार को अपील की थी कि प्रधान न्यायाधीश को खुद को न्यायिक प्रशासनिक कार्यो से दूर रखने पर विचार करना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि उन्हें पद से हटाए जाने के लिए नोटिस देने के बाद उनकी तरफ से यह फैसला स्वैच्छिक रूप से आना चाहिए था।

कांग्रेस और छह अन्य विपक्षी दलों ने कदाचार के पांच आधारों पर प्रधान न्यायाधीश मिश्रा के खिलाफ महाभियोग का नोटिस दिया था।

इस प्रस्ताव पर 71 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे, जिसमें से सात सांसद नायडू के समक्ष प्रस्ताव पेश करने से पहले सेवानिवृत्त हो गए थे।

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