नई दिल्ली, 26 नवंबर (आईएएनएस)। निजी क्षेत्र में भी नौकरी में आरक्षण की मांग करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने गुरुवार को कहा कि संविधान के रचयिता डॉ भीम राव अम्बेडर पर केवल संसद में चर्चा करने के स्थान पर यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
माकपा ने अपने साप्ताहिक समाचार पत्र ‘पीपल्स डेमोक्रेसी’ के एक संपादकीय में लिखा, “यह एक अपूर्ण एजेंडा है जिसे संप्रग सरकार पूरा करने में नाकाम रही। नौकरी और शिक्षा में दिया गया आरक्षण तभी सार्थक हो सकता है जब वह निजी क्षेत्र में भी लागू किया जाए।”
अंबेडकर की 125वीं जयंती मनाने के लिए एक दो दिवसीय विशिष्ट बैठक के साथ संसद का शीतकालीन सत्र गुरुवार से शुरू हुआ।
संपादकीय के मुताबिक, “इसमें संदेह नहीं कि संविधान के रचयिता और सामाजिक समानता के समर्थक अंबेडकर की विरासत का स्मरण किया जाना चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि यह किस प्रकार किया जाए?”
माकपा ने कहा कि राज्य सभा को लोक सभा द्वारा पास किया गया अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) 2015 विधेयक स्वीकार करना चाहिए जिसका उद्देश्य मौजूदा अधिनियम को मजबूत बनाना है।
माकपा ने कहा कि इसके साथ ही सरकार को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति उप-योजना को वैधानिक दर्जा देने के लिए कानून बनाना चाहिए।
संपादकीय के मुताबिक, “जाति के आधार पर निरंतर असमानता और अन्याय झेल रहे दलितों पर रिपोर्ट पेश करके और भारतीय समाज में व्याप्त स्थिति को सुधारने के लिए खाका तैयार करके सरकार संसद की इस बैठक को सार्थक बना सकती थी।”
संपादकीय में कहा गया कि केवल भाषण देने और अंबेडकर को श्रद्धांजलि देने के अतिरिक्त कुछ भी ठोस न करके भाजपा सरकार ने बैठक के महत्व को निर्थक कर दिया है।
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