राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के सम्मलेन एवं संगोष्ठी ‘शिक्षा समग्र व व्यापक’ विषय पर बोरा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज में देशपांडे ने कहा, “शिक्षा करियर का मुद्दा हो गई है। वह ज्ञानव्यापी की जगह अर्थव्यापी हो चुकी है। जबकि शिक्षा का मौलिक उद्देश्य मनुष्य की क्षमताओं का वर्धन करना है। हमें शिक्षा में परिवर्तन लाना होगा और इसे शिक्षा के अर्थशास्त्र की जगह शिक्षा का ज्ञान शास्त्र बनाना होगा।”
देशपांडे ने कहा, “भाषा हमारी संस्कृति की निर्देशक है, जो छात्रों में मौलिक चिंतन और खोज को विकसित करती है। आज हमारे देश में शिक्षा की तस्वीर उल्टी हो चुकी है। प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक नहीं मिलते और महाविद्यालयों में छात्र नहीं मिलते। इस गंभीर प्रश्न पर संगठनों, समाज व सरकारों को व्यापक विचार विमर्श करना होगा।”
कार्यक्रम में मौजूद उत्तर प्रदेश के प्राविधिक एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा, “तकनीक आसान और सस्ती हो इसके लिए सरकार प्रयास कर रही है। नई तकनीक को समाज के अनुकूल बनाने प्राविधिक शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता कैसे बढ़े, सरकार इस पर काम कर रही है। शिक्षा की गुणवत्ता व रोजगार एक दूसरे से जुड़ा विषय है, जब शिक्षा में गुणवत्ता होगी तो रोजगार भी आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। हम साफ सुथरी और पारदर्शी व्यवस्था बना रहे हैं।”
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल ने इस दौरान शिक्षकों को अपने दायित्व के प्रति सजग रहने के लिए आगाह किया। वहीं सरकार की नीतियों व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए बेहतर सुधार के लिए सुझाव आमंत्रित किए।
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