नई दिल्ली, 20 मई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने मेडिकल के स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) को एक साल तक टालने के लिए शुक्रवार को अध्यादेश पर मुहर लगा दी।
नीट की प्रभावोत्पादकता पर कुछ राज्यों द्वारा आपत्ति जताने के बाद सरकार ने इस आशय का फैसला किया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में अध्यादेश जारी करने का फैसला किया गया।
अध्यादेश जारी करने के फैसले से एनईईटी कराने के शीर्ष अदालत के 9 मई के फैसले पर रोक लग गई है।
शीर्ष अदालत के फैसले पर रोक लगाने के लिए अब अध्यादेश को स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास भेजा जाएगा।
स्नातक स्तर पर मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिला केवल नीट के जरिए लेने के शीर्ष अदालत के फैसले से महाराष्ट्र, गुजरात, जम्मू एवं कश्मीर और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों ने घोर असहमति जताई थी।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा अंग्रेजी और हिन्दी माध्यम में नीट के आयोजन पर इन राज्यों ने कड़ी आपत्तियां दर्ज कराईं थीं।
इन राज्यों का कहना था कि समान प्रवेश परीक्षा से दक्षिणी और गैर उत्तरी राज्यों के छात्र बुरी तरह प्रभावित होंगे जहां ऐसी परीक्षाएं अंग्रेजी या क्षेत्रीय भाषाओं में होती हैं।
इन राज्यों का कहना था कि प्रवेश परीक्षा के लिए उनके पाठ्यक्रम बिल्कुल भिन्न हैं। इसलिए इस साल सीबीएसई पाठ्यक्रम का अनुसरण करना उनके छात्रों के लिए कठिन होगा, क्योंकि वे राज्य बोर्डो द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रमों का पहले ही अध्ययन कर चुके हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी नड्डा ने गत सप्ताह राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी और उन्हें राज्य मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में सम्मलित होने वाले छात्रों की चिंताओं को दूर करने का आश्वसन दिया था।
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