पटना, 8 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिहार के लिए 1़ 25 लाख करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा के बाद शुरू हुई दलीय राजनीति जारी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर पुरानी योजनाओं की री-पैकेजिंग कर उसे विशेष पैकेज नाम दिए जाने का विरोध किया।
मुख्यमंत्री ने जेटली को लिखे पत्र में 14वें वित्त आयोग से बिहार को हुए नुकसान और विशेष पैकेज में पुरानी योजनाओं की राशि जोड़े जाने पर अपनी आपत्ति जताई है।
मुख्यमंत्री ने पत्र के साथ सभी पुरानी योजनाओं का ब्योरा भी संलग्न किया है।
पत्र में नीतीश ने केंद्रीय मंत्री से विशेष पैकेज के विषय में कई जानकारियां भी उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। उन्होंने पत्र के माध्यम से पैकेज में केंद्र द्वारा दी जाने वाली राशि का ब्योरा, पैकेज की समयावधि तथा यह बाताने का भी आग्रह किया कि घोषित राशि से जो काम होंगे, वे कौन सी एजेंसी करवाएगी।
नीतीश ने जेटली को लिखा है कि बिहार के विकास के लिए पैकेज नहीं, ‘विशेष राज्य’ का दर्जा जरूरी है। इसके बिना बिहार के विकास की बात बेमानी है, क्योंकि सभी खनिज संपदा और उद्योग-धंधे राज्य बंटवारे के बाद झारखंड में चले गए हैं।
प्रधानमंत्री ने आरा में आयोजित एक रैली में 1़ 25 लाख करोड़ के विशेष पैकेज की घोषणा की थी। उनकी घोषणा के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री ने पटना में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर अपनी नाराजगी जताई थी। इसके बाद विभिन्न सभाओं में भी इस पैकेज को ‘री-पैकेजिंग’ बताते हुए वह केंद्र सरकार को कोसते रहे हैं। वह विशेष पैकेज की घोषणा करने के प्रधानमंत्री के तरीके की आलोचना करते हुए उसे ‘बिहार की बोली लगाना’ बता चुके हैं। स्थानीय समाचारपत्रों में भी सरकारी विज्ञापन के सहारे नाराजगी जताई जा रही है।
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