पटना, 14 नवंबर (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा चुनाव में नया जनादेश मिलने के बाद महागठबंधन विधायक दल के नेता नीतीश कुमार ने शनिवार को राज्यपाल रामनाथ कोविंद से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। 20 नवंबर को नीतीश सहित 36 सदस्यीय मंत्रिमंडल शपथ लेगा।
बिहार में नई सरकार के गठन के लिए महागठबंधन के नेता नीतीश शनिवार शाम राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद के साथ राजभवन पहुंचे। राज्यपाल से मुलाकात कर उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया।
राज्यपाल से मिलने के बाद नीतीश ने संवाददाताओं से कहा, “20 नवंबर को दिन के दो बजे ऐतिहासिक गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जाएगा।”
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “बिहार विकास के रास्ते पर चल चुका है, कानून का राज है, आगे भी रहेगा।”
शपथ ग्रहण समारोह में क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुलाया जाएगा? इस सवाल का सीधा जवाब न देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे समारोहों में कई नेताओं को बुलाने की परिपाटी रही है। इस समारोह में भाग लेने के लिए भी कई नेताओं को आमंत्रित किया जाएगा।
इसके पहले महागठबंधन के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में नीतीश कुमार को महागठबंधन विधायक दल का नेता चुन लिया गया।
पटना में जनता दल (युनाइटेड), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नव निर्वाचित विधायकों ने एक संयुक्त बैठक में नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से महागठबंधन विधायक दल का नेता चुना।
महागठबंधन विधायक दल की बैठक के बाद जद (यू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने बताया कि महागठबंधन विधायक दल की बैठक में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने नीतीश कुमार के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका कांग्रेस महासचिव सी़ पी़ जोशी ने समर्थन किया।
इससे पहले जद (यू) विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को पार्टी विधायक दल का नेता चुना गया।
बैठक के बाद पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह ने बताया कि जद (यू) विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को एक बार फिर नेता चुना लिया गया। उन्होंने बताया कि बैठक में नीतीश कुमार के नाम का प्रस्ताव जद (यू) के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र यादव ने रखा, जिसका समर्थन श्याम रजक ने किया।
प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार को औपचारिक रूप से जद (यू) विधायक दल का नेता चुन लिया गया।
इससे पहले मुख्यमंत्री नतीश ने राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें अपना इस्तीफा सौंपने की औपचारिकता पूरी की। उन्होंने 15वीं विधानसभा भंग करने की अनुशंसा भी की।
राज्यपाल कोविंद से मुलाकात के बाद नीतीश ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने राज्यपाल से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है और 15वीं विधानसभा भंग करने के राज्य मंत्रिमंडल के फैसले से अवगत कराया है। राज्यपाल ने उन्हें राज्य में नई सरकार बनने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहने को कहा है।
इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में यहां मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें राज्यपाल से 15वीं विधानसभा को भंग करने की अनुशंसा संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
जद (यू) नेताओं के अनुसार, 20 नवंबर को 36 सदस्यीय मंत्रिपरिषद के सदस्य भी शपथ लेंगे। हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल में 16 मंत्री लालू प्रसाद के राजद से, 15 मंत्री जद (यू) से और पांच मंत्री कांग्रेस से होंगे।
उल्लेखनीय है कि 243 सदस्यीय राज्य विधानसभा के चुनाव में महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 80 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, जबकि जद (यू) ने 71 सीटों पर जीत दर्ज की है और कांग्रेस के खाते में 27 सीटें आई हैं। इस चुनाव में बिहार की जनता ने दिल्ली की जनता की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिखाए सारे सपनों और वादों को सिरे से नकार दिया।
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