काठमांडू, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। दिलराज गिरि अस्पताल के बिस्तर पर बेहोशी की हालत में लेटे हैं, जबकि आस-पास के बिस्तर घायलों से भरे हुए हैं, और उनके आस-पास नर्स मौजूद हैं। लेकिन कई मशीनों के बीच घिरे दिलराज उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें गंभीर चोटें आई हैं तथा नेपाल में आए भूकंप के दौरान उनका परिवार उनके साथ नहीं था।
काठमांडू, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। दिलराज गिरि अस्पताल के बिस्तर पर बेहोशी की हालत में लेटे हैं, जबकि आस-पास के बिस्तर घायलों से भरे हुए हैं, और उनके आस-पास नर्स मौजूद हैं। लेकिन कई मशीनों के बीच घिरे दिलराज उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें गंभीर चोटें आई हैं तथा नेपाल में आए भूकंप के दौरान उनका परिवार उनके साथ नहीं था।
आईएएनएस के संवाददाता ने जब नेशनल ट्रामा सेंट्रर का दौरा किया, तो उसने वहां हर तरफ मरीजों और नर्स तथा चिकित्सकों को देखा। इस केंद्र का उद्घाटन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नेपाल दौरे पर किया था।
यहां दिलराज का अपना कोई नहीं है। दिलराज को सिर और छाती में गंभीर चोटें आई हैं, हालांकि चिकित्सक और नर्स उनका पूरा खयाल रख रहे हैं।
एक चिकित्सक प्रदीप कोईराला ने आईएएनएस को बताया कि शनिवार को भूकंप आने के बाद वह लगातार काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “घायलों एवं मृतकों को लगातार लाया जा रहा है।”
भूकंप के आने के बाद से चिकित्सक और नर्स अपने घर नहीं गए।
उन्होंने कहा, “हम अस्पताल में ही सोते हैं।”
49 वर्षीय राम बहादुर लामा शनिवार से ही बेहोश हैं। उसके बचने की उम्मीद कम है, लेकिन चिकित्सक उसके उपचार में लगे हुए हैं।
उसके बेटे संतार लामा (29) ने आईएएनएस को बताया कि उसके पिता का हाथ और पैर टूट गया है और उन्हें भी छाती में गंभीर चोटें आई हैं।
संतार लामा ने बताया, “जब भूकंप आया, मेरे पिता सोए हुए थे। हम भागकर बच निकले लेकिन पिता घर के मलबे में फंस गए।”
उन्होंने बताया, “उन्हें निकालने में 15 से 20 मिनट लगा और तब से वह बेहोश हैं।”
पास के ही बिस्तर पर लेटे एक युवा इंजीनियर रेमंड बाला (22) के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। उसकी एक रिश्तेदार ने आईएएनएस को बताया कि रेमंड की मां बेटे के बारे में जानकर सदमे में हैं और उनकी हालत दयनीय है।
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