काठमांडू, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल में भूकंप पीड़ित लोगों के धैर्य का बांध टूटता जा रहा है। बुधवार को लोगों ने राहत कार्यो में सरकारी इंतजामों की कमी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए। वहीं इस भीषण जलजले के कारण चारों ओर तबाही का मंजर है। बुधवार तक इस त्रासदी में 5,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं।
काठमांडू, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल में भूकंप पीड़ित लोगों के धैर्य का बांध टूटता जा रहा है। बुधवार को लोगों ने राहत कार्यो में सरकारी इंतजामों की कमी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए। वहीं इस भीषण जलजले के कारण चारों ओर तबाही का मंजर है। बुधवार तक इस त्रासदी में 5,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं।
घातक भूकंप के चार दिनों बाद यहां पर ज्यादातर दुकानें खुल गई हैं और काठमांडू की सड़कों पर यातायात सुचारु रूप से चलने लगा है। प्रशासन ने बिजली आपूíत बहाल कर दी है और ज्यादातर इलाकों में टेलीफोन सुविधा शुरू हो काम करने लगी है।
अब 7.9 तीव्रता वाले भूकंप और उसके बाद आए झटकों में कमी आई है इससे लोगों ने राहत की सांस ली है। इन आपदा के कारण हजारों लोग खुले में रह रहे हैं।
नेपाल में भूकंप से पीड़ित हजारों लोग अभी भी दुखी हैं। कुछ पीड़ितों ने बुधवार को अपर्याप्त राहत कार्यो के विरोध में प्रदर्शन किए।
सैकड़ों नागरिकों ने बुधवार को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार पर राहत सामग्री उपलब्ध कराने में विफल होने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने गृहमंत्री बामदेव गौतम के इस्तीफे की मांग की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हाथापाई हो गई।
वहीं शहर में एक अन्य जगह भीड़ ने एक बस पार्किं ग क्षेत्र में एक टिकट काउंटर में तोड़फोड़ कर दी। उन्हें राजधानी से बाहर जाने के लिए टिकट नहीं मिला था।
डोलखा जिले में पीड़ित पुरुष और महिलाओं ने स्थानीय प्रशासन कार्यालयों पर धरना दिया और राहत सामग्री, खाना और टेंट की मांग की। वे कार्यालयों में घुसे और उन्होंने कुर्सियों, मेज और पर्दो में आग लगा दी।
नेपाल में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय राहत सामग्री का भारी मात्रा में भंडार होने के बावजूद सरकार कई जिलों में राहत सामग्री पहुंचाने में असफल रही है।
सूचना एवं संचार मंत्री मिनेंद्र रिजाल ने स्वीकार किया कि देश के सभी हिस्सों में लोगों तक राहत पहुंचाने में कुछ कमियां रह गई हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति को जल्द ही सुधार लिया जाएगा।
गृहमंत्रालय के प्रवक्ता लक्ष्मी प्रसाद ढकाल ने कहा, “हम अपना बेहतर प्रयास कर रहे हैं हां कुछ कमियां भी रह गई हैं।”
मौत के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक यह नेपाल में 1934 में आए भूकंप से भयानक जलजला था। 1934 में आए भूकंप में 8,000 लोगों की मौत हुई थी। लेकिन नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने चेताया है कि इस त्रासदी में 10,000 से अधिक लोग की मौत की संभावना है।
अधिकारियों ने कहा कि नेपाल ने हाल के वर्षो में इस तरह के भूकंप का कभी सामना नहीं किया। यह समस्याएं बुनयादी ढांचे, तकनीकी विशेषज्ञता और ज्ञान की कमी, किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए तैयारियों की कमी से उत्पन्न हुई है।
सरकार ने बुधवार को बताया कि अभी तक इस आपदा में 5,006 लोगों के मारे जाने और 10,224 लोगों के घायल होने की जानकारी प्राप्त हुई है। काठमांडू जिले में अकेले 1,039 लोगों की जान गई है।
नेपाल में भारी मात्रा में अंतर्राष्ट्रीय सहायता पहुंच रही है।
भारत इस त्रासदी के बाद राहत और बचाव सामग्री पहुंचाने वाला सबसे पहला देश था। लेकिन भारतीय अधिकारियों का कहना है कि त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हजारों किलो दवाएं, सूखे खाद्य पदार्थ, टेंट और अन्य सामान जमा रखा हुआ है।
भीषण जलजले के बाद नेपाल विदेशी सहायता से अभिभूत है। लेकिन इस सहायता को भूकंप प्रभावितों तक पहुंचाने में उसे समस्या हो रही है। इसीलिए नेपाल ने न्यूजीलैंड और ताइवान से सहायता लेने से इंकार कर दिया है।
नेपाल में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय राहत सामग्री का भारी मात्रा में भंडार होने के बावजूद सरकार कई जिलों में राहत सामग्री पहुंचाने में असफल रही है। भूकंप पीड़ितों को खाना, पानी, दवाओं और टेंट भी भारी आवश्यकता है।
अधिकारियों ने स्वीकार किया है सरकारी एजेंसियों में उचित समन्वय की कमी है। बारिश के कारण दूरदराज के इलाकों में पहुंचना मुश्किल हो रहा है जिससे राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हुआ है।
काठमांडू घाटी में विभिन्न स्थानों पर भारत, श्रीलंका, चीन, तुर्की, नीदरलैंड, पोलैंड, जर्मनी, फ्रांस, इजरायल, मलेशिया और जापान के राहत दलों को तैनात किया गया है।
गृहमंत्रालय के अनुसार श्रीलंका के दल ने एक नौजवान को बालाजू इलाके से जीवित निकाला है।
इस बीच नेपाल की सेना के बचाव दल और सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस ने मनांग और मुस्तांग से 1,600 पर्यटकों को बचाया और उन्हें पोखरा पहुंचाया गया।
भूकंप के झटकों और महामारी के डर से हजारों नेपाली नागरिक काठमांडू से बाहर जाने के लिए परिवहन व्यवस्था की मांग रहे हैं। सैकड़ों भारतीय नागरिक भी हवाई और सड़क मार्ग से अपने देश वापस लौट रहे हैं।
आईएएनएस संवाददाता ने टुंडीखेल का दौरा किया। यह एक मैदान है जो कि अब लोगों का निवास स्थान बन गया है। यहां पर विभिन्न रंगो के टेंट लगे हुए हैं। संवाददाता ने पीड़ितों के साथ इन्हीं टेंट में मंगलवार की रात बिताई।
बारिश के कारण मैदान में कीचड़ हो गया है और इससे लोगों का जीवन और कठिन हो गया है।
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