किसान पंचायत में कहा गया कि पूर्व मंे कई बार किसानों ने स्वयं मिलकर व लिखित में प्रार्थना पत्र देकर मांग की है कि उच्च न्यायालय के 21 अक्टूबर, 2011 के आदेशानुसार जिन किसानों की 10 प्रतिशत भूमि प्राधिकरण द्वारा काटी गई थी, उसे विकसित कर 10 प्रतिशत आवासीय भूखंड आवंटित करने के आदेश पारित किया था। इसे उच्चतम न्यायालय ने भी यथावत रखा, लेकिन प्राधिकरण में बैठे किसान विरोधी अधिकारी तरह-तरह से किसानों को गुमराह कर रहे हैं।
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