नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एकबार फिर नोटबंदी के अपने फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि नोटबंदी राजनीतिक फैसला नहीं है और न ही यह किसी राजनीतिक दल को परेशान करने की लड़ाई है।
राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा, “दुनिया में कहीं इतना बड़ा और व्यापक निर्णय नहीं हुआ, इसलिए दुनिया के अर्थशास्त्रियों के पास भी इसके मूल्यांकन के लिए कोई मापदंड नहीं है।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “ऐसा पहली बार हुआ है कि जनता का मिजाज कुछ है और नेताओं का मिजाज उनसे अलग। इस बार सरकार और जनता साथ-साथ थी।”
मोदी ने नोटबंदी के फायदे गिनाते हुए कहा, “नोटबंदी से गरीबों को फायदा हुआ। गरीबों का हित छीन लिया जाता है और मध्यम वर्ग का शोषण होता है। हम कब तक इन समस्याओं को लेकर गुजारा करेंगे। दुश्मन देश में जाली नोटों का कारोबार करने वालों को आत्महत्या करनी पड़ी।”
मोदी ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में सबसे ज्यादा नक्सलवादियों ने समर्पण किया है। सरकार ने असम के चाय बागान मजदूरों को बैंक खाते खुलवाए। इस कारण उन्हें पूरा वेतन मिलने लगा। जब इतनी ज्यादा धनराशि बैंकों के पास आई तो कर्ज देने की ताकत बढ़ी और ब्याज दर कम हुई।”
प्रधानमंत्री ने नोटबंदी को कड़ा फैसला कहते हुए उसके बाद आई परेशानियों की बात स्वीकार की।
उन्होंने कहा, “परेशानियां तो आईं, लेकिन क्या परेशानियों के कारण कुछ करना छोड़ देना चाहिए?”
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