शिवपाल ने रविवार को पार्टी कार्यालय में जनता की समस्याएं सुनीं और दूर-दराज से आई जनता की समस्याओं का ज्यादा से ज्यादा निराकरण का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने जनता व कार्यकर्ताओं के साथ चुटकी लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री देश की जनता को कैशलेस की ओर ले जाना चाहते हैं, लेकिन उनकी बात को एटीएम एवं बैंकों ने ही गंभीरता से लिया है। जनता ने तो उनकी बात को नकार ही दिया।
उन्होंने कहा कि अब तक करीब साढ़े तेरह लाख करोड़ के 500 और 1000 के पुराने नोट बैंकों में जमा हो चुके हैं और पूरी उम्मीद है कि 30 दिसंबर की सीमा तक बाकी के डेढ़ लाख करोड़ भी बैंकों में जमा हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार सोच रही थी कि जो नोट रिकवर नहीं होंगे, उसे कालाधन मानकर सरकार के प्रॉफिट में जोड़ देंगे और कालाधन घोषित कर देंगे। उसका ये प्लान फेल हो गया।
यादव ने कहा कि नए नोट छपने का खर्च करीब 1.28 लाख करोड़ तक जाएगा। मतलब खाया-पिया कुछ नहीं और गिलास तोड़ा बारह आना।
शिवपाल ने कहा कि वितमंत्री कह ही चुके हैं कि ये समस्या तीन महीने तक रह सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले नोटबंदी को 2-3 दिन की परेशानी बताई थी, फिर 50 दिन, लेकिन अब 50 दिन की जगह तीन महीने बोला जा रहा है। वहीं एक्सपर्ट का कहना है कि पूरे नोट छपने में करीब छह महीने लगेंगे और इकोनोमी रिकवर करने में सालों लग सकते हैं।
कैशलैस पर यादव ने सवाल उठाया कि जिस देश में क्रेडिट कार्ड सिर्फ दो फीसद लोगों के पास है और गांवों में एटीएम और बैंक अभी तक पहुंचे ही नहीं हैं, आप उनसे कैसे कह रहे हो ‘हो जाओ कैशलेस’? यह संवेदनहीनता है।
उन्होंने कहा कि कैशलेस होने वाले लोग पिछले 10 साल से कैशलेस हैं और इंटरनेट बैंकिंग कर रहे हैं। उन्हें प्रधानमंत्री की सलाह की जरूरत नहीं है। लेकिन कैश को फ्रीज करके लोगों को मजबूर करके, आप उन्हें अपग्रेड नहीं, बल्कि प्रताड़ित कर रहे हैं।
शिवपाल ने कहा कि वह शुरू से ही कह रहे है कि ‘ब्लैक मनी’ का मुद्दा हाथ से जाने के बाद अब मोदी सरकार के पास ‘हो जाओ कैशलेस’ नारा ही बचा है। थोड़े दिनों में यह भी जुमला ही बन जाएगा।
dharmpath.com dharmpath