आपना दल के प्रवक्ता एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एडवोकेट आर.बी. सिंह पटेल ने गुरुवार को अपने बयान में कहा, “नोटबंदी से पूरे भारत में आर्थिक आपातकाल जैसा माहौल उत्पन्न हो गया है। अर्थशास्त्रियों के राय लिए बिना अचानक नोटबंदी का फरमान सुनाना देशहित में नहीं था। नोटबंदी से छोटे उद्योग तबाह हो गए। बड़े उद्योगों पर बुरा प्रभाव पड़ा, जिसके कारण कर्मचारियों की छटनी बड़े पैमाने पर की गई। लगभग 20 लाख नौजवान बेरोजगार हो गए।”
उन्होंने कहा, “एक साल हो जाने के बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था संभल नहीं पा रही है। ऊपर से जीएसटी लागू कर मध्यमवर्गीय आदमियों की कमर तोड़ दी। महंगाई चरम सीमा पर फैल गई। कुल मिलाकर नोटबंदी को आर्थिक आपातकाल की संज्ञा दिया जाना ही उचित है। नोटबंदी का फायदा उठाने वाले भले ही इसकी बरसी पर जश्न मनाएं, लेकिन इसका दर्द जिसने सहा है, जो लोग तबाह हुए, उन्हें बहला नहीं सकते।”
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