कोलकाता, 2 फरवरी (आईएएनएस)। एलजीबीटी समुदाय ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय के समलैंगिक संबंधों को अपराध करार देने वाली भारतीय दंड संहिता की धारा 377 पर पुनर्विचार के लिए दायर सुधारात्मक याचिका को पांच सदस्यीय पीठ को सौंपने के निर्णय की सराहना की है।
शुरू में याचिका के खारिज होने से आशंकित एलजीबीटी समुदाय ने अदालत के निर्णय को ‘सही दिशा में बढ़ाया गया एक कदम’ बताया।
एलजीबीटी अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता पवन ढाल ने आईएएनएस से कहा, “हमें डर था कि याचिका खारिज कर दी जाएगी। लेकिन अब हम अगली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।”
सामाजिक कार्यकर्ता रंजिता सिन्हा ने अदालत के निर्णय की सराहना की और कहा कि इससे समलैंगिकता पर फिर से चर्चा शुरू होगी।
सिन्हा ने कुछ अन्य कार्यकर्ताओं के साथ सोमवार को समलैंगिकता को अपराध करार देने वाली धारा 377 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।
कोलकाता वासी सामाजिक कार्यकर्ता समलैंगिक सौविक ने इसे सकारात्मक बताया है।
उन्होंने आईएएनएस से कहा, “देखते हैं आगे क्या होता है..एलजीबीटी समुदाय मजबूती से एक-दूसरे के साथ है और हमें आम लोगों से भी समर्थन की उम्मीद है, खासकर युवाओं से, क्योंकि वे बेहतर तरीके से लैंगिक मुद्दों को समझते हैं।”
सर्वोच्च न्यायालय की पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ अब गैर सरकारी संगठन नाज फाउंडेशन एवं अन्य द्वारा दायर सुधारात्मक याचिका पर सुनवाई करेगी। याचिका में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ही समलैंगिक संबंधों को अपराध करार देने वाली धारा 377 की वैधानिकता को मंजूरी देने वाले सर्वोच्च न्यायालय के ही एक फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
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