पटना, 6 दिसंबर (आईएएनएस)। पटना के नवनिर्मित सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर के ज्ञान भवन में चल रहे 24वें पटना पुस्तक मेले के पांचवें दिन बुधवार को नवोदित कवि और कवयित्रियों ने कविता लेखन और कविता पाठ के गुर सिखे। इसके अलावा कवयित्री सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें कई संदेश देती कविताएं सुनाई गईं।
सेंटर फॉर रीडरशिप डेवलपमेंट (सीआरडी) और कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा आयोजित 10 दिवसीय पुस्तक मेले में रशीदन बीवी मंच पर ‘कविता की कार्यशाला’ आयोजित की गई। इस कार्यशाला में कवि संजय कुंदन ने कहा कि लगभग 90 प्रतिशत लोग कवि होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति के लिए कविता अलग अर्थ रखती और हर आदमी इससे अलग-अलग काम लेना चाहता है।
उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि कविता लिखना एक दुरूह कार्य है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। कविवर सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की मिसाल पेश करते हुए उन्होंने कहा कि कविता के लिए समर्पित लोगों को जीवन तक को दांव पर लगाना पड़ता है।
इस मौके पर कई नवोदित कवियों व कवयित्रियों के सवालों का जवाब देते हुए कुंदन ने बताया, “अच्छी कविता निखने के लिए विश्व की मुख्यधाराओं की कविता पड़ना आवश्यक है। कविता को साधना पड़ता है। आत्मालोचना और सहनशक्ति एक कवि के लिए जरूरी गुण है।”
इस मौके पर उन्होंने कविता पाठ के भी गुर सिखाए।
पुस्तक मेले में बुधवार को ‘आयाम’ की ओर से एक कवयित्री सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के प्रारंभ में पत्रकार और कवयित्री निवेदिता झा ने एक प्रेम कविता ‘सारी रात सोया पड़ा रहा चांद मेरे सिरहाने, भोर तक जागती रही मैं’ सुनाई।
इसके बाद डॉ़ भवना शेखर ने ‘पुरुष’ शीर्षक एक कविता सुनाई। इस कविता के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि पुरुष भी निरीह होते हैं और उन्हें भी प्रेम की जरूरत है।
उन्होंने ‘पुरुष भी तोड़ते हैं पत्थर, शोषण इनका भी होता है, साथ चलकर तो देखो, एतबार कर के देखो’ जैसी पंक्तियों से दर्शकों का ध्यान आकृष्ट किया। इसके बाद डॉ़ वीणा अमृत ने ‘दुर्लभ शब्द’ शीर्षक कविता सुनाई।
कवयित्री सुमन सिन्हा ने ‘अंधेरे का सच’ कविता के जरिए लोगों की वाहवाही लूटी, जबकि बेबी कृष्णा ने ‘ये चांद धरा पर आजा, तू शीतलता बरसा से’ लोगों की तालियां बटोरीं। अंत में साहित्यकार पद्मश्री डॉ़ उषा किरण खान ने कवयित्रियों को कई संदेश दिए।”
पुस्तक मेले में पत्रकार और कथाकार गीताश्री के उपन्यास ‘हसीनाबाद’ का साहित्यकार डॉ़ उषा किरण खान, कथाकार ऋषिकेश सुलभ और अवधेश प्रीत ने लोकार्पण किया।
डॉ़ उषा किरण ने कहा कि ‘हसीनाबाद’ कला, संगीत और इतिहास का बेजोड़ संगम और मील का पत्थर साबित होगा। इस मौके पर अवधेश प्रीत ने कहा कि यह उपन्यास स्त्री पर केंद्रित है पर पुरुष निषेध नहीं है। इस मौके पर उन्होंने उपन्यास के अंशों का पाठ भी किया।
पटना पुस्तक मेले के 24वें संस्करण का विषय लड़कियों और महिलाओं को समर्पित है। इस बार का विषय ‘लड़की को सामथ्र्य दो, दुनिया बदलेगी’ रखा गया है। दो दिसंबर को शुरू यह पुस्तक मेला 11 दिसंबर तक चलेगा।
इस पुस्तक मेला में 210 स्टॉल लगाए गए हैं तथा मेले में बिहार और देशभर के 112 प्रकाशक भाग ले रहे हैं।
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