पटना, 8 फरवरी (आईएएनएस)। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित 23वें पटना पुस्तक मेले में पुस्तक प्रेमियों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। मेले में बुधवार को ‘साहित्य में वर्ण व्यवस्था’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।
मेले के पांचवें दिन बुधवार को स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए कथा लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसके अलावा पटना के प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शांति राय की पुस्तक ‘गर्भ एवं प्रसव ज्ञान’ का लोकार्पण किया गया।
सेंटर फार रीडरशिप डेवलपमेंट (सीआरडी) द्वारा आयोजित पटना पुस्तक मेले में बुधवार को भोजपुरी मुक्ताकाश मंच पर ‘साहित्य में वर्ण व्यवस्था’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में भाग लेते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संजीव कुमार ने कहा, “ब्राह्ममणवादी व्यवस्था को तोड़ने के लिए साहित्य में वर्ण व्यवस्था का होना अनिवार्य है।”
उन्होंने कहा, “दलित अब स्पॉटलाइट में हैं। आज की कहानियों में यह एक ज्वलंत विषय है। हर अच्छा साहित्य सभी को नई दृष्टि देता है।”
परिचर्चा में भाग लेते हुए दूरदर्शन के समाचार संपादक संजय कुमार ने मीडिया में दलितों की सहभागिता को कम बताते हुए कहा, “साहित्य का वर्गीकरण जरूरी है। प्रसंगवश उन्होंने प्रेमचंद की कहानी ‘सवा सेर गेहूं’ की भी चर्चा की।”
इधर, मेला परिसर में कथाकार सुमन वाजपेयी ने लगातार दूसरे दिन बच्चों को कहानी लिखने की कला की बारीकियों से अवगत कराया। ‘मसि संस्था’ द्वारा बच्चों के लिए आयोजित कथा लेखन कार्यशाला के बाद कथा लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
इस प्रतियोगिता में विभिन्न स्कूलों से आए बच्चों ने पर्यावरण, बालश्रम, नारी सशक्तीकरण, गरीबी और परमाणु युद्ध जैसे विषयों पर अपनी लेखनी चलाई। इस प्रतियोगिता का परिणाम 12 फरवरी को प्रकाशित किया जाएगा।
पटना पुस्तक मेले में पटना के प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ़ शांति राय की पुस्तक ‘गर्भ एवं प्रसव ज्ञान’ का लोकार्पण के मौके पर पुस्तक की लेखिका ने बताया, “इस पुस्तक में बच्चे के सृजन, महिला के आंतरिक अंगों की बनावट, उसके विकास तथा उसके रख रखाव में कमी के कारण होने वाली बीमारियों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला गया है।” उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में गर्भ और प्रसव ज्ञान से जुड़ी जानकारियों को भी साझा करने की कोशिश की गई है।
इस मौके पर पद्मश्री डॉ. नरेंद्र प्रसाद ने कहा, “मेडिकल साइंस की जानकारी के लिए अंग्रेजी भाषा में कई पुस्तकें उपलब्ध हैं परंतु शांति राय ने हिंदी में प्रसव और गर्भ से संबंधित जनकारी प्रस्तुत की है, जो प्रशंसनीय है।”
उल्लेखनीय है कि यह मेला चार फरवरी को शुरू हुआ, जो 14 फरवरी तक चलेगा। इस पुस्तक मेला में 300 प्रकाशकों ने भाग लिया है।
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