नई दिल्ली, 7 जनवरी (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा है कि सरकार को पठानकोट वायुसेना अड्डे पर आतंकी हमले का जवाब देने में हुई विफलताओं को स्वीकार करना चाहिए और मामले की ‘यथोचित जांच’ करानी चाहिए।
नई दिल्ली, 7 जनवरी (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा है कि सरकार को पठानकोट वायुसेना अड्डे पर आतंकी हमले का जवाब देने में हुई विफलताओं को स्वीकार करना चाहिए और मामले की ‘यथोचित जांच’ करानी चाहिए।
माकपा ने साथ ही सरकार से आग्रह किया है कि सरकार को पाकिस्तान के साथ अपनी प्रस्तावित वार्ता पर टिके रहना चाहिए। पार्टी ने कहा कि इसके उलट कोई भी कार्रवाई ‘केवल देश के रणनीतिक विकल्पों को ही संकुचित करेगी।’
माकपा के मुखपत्र पीपुल्स डेमोक्रेसी के संपादकीय में लिखा गया है, “मोदी सरकार को यह मानना ही चाहिए कि विफलताएं हुई हैं जिन्होंने कई परेशान करने वाले सवाल खड़े किए हैं। सरकार को इसे प्रतिष्ठा से नहीं जोड़ना चाहिए। कमियों को स्वीकार करना चाहिए और यथोचित जांच करानी चाहिए ताकि आगे से ऐसी गलतियां न हों।”
संपादकीय में लिखा गया है कि जिस बात की तुरंत जरूरत है वह आतंकी कार्रवाई को दिए गए अव्यवस्थित और अस्थिर जवाब की समीक्षा है।
यह बताते हुए कि कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों ने पठानकोट की घटना को असफलता बताया है, संपादकीय में लिखा गया है, “पूरे आपरेशन से कई सवाल खड़े हुए हैं।”
संपादकीय में पूछा गया है कि हमले की पर्याप्त चेतावनी मिलने के बावजूद आतंकी वायुसेना अड्डे में घुसने में कैसे कामयाब हो गए। इसमें पूछा गया है कि सेना को तलाशी अभियान के लिए क्यों नहीं बुलाया गया जबकि पठानकोट में ही एक बड़ा सैन्य अड्डा मौजूद है।
संपादकीय में कहा गया है कि अड्डे की परिधि की रक्षा की जिम्मेदारी सेना से अवकाश प्राप्त डिफेन्स सिक्योरिटी कार्प्स के जवानों पर छोड़ दी गई। सबसे ज्यादा मौतें इन्हीं की हुईं।
संपादकीय में कहा गया है, “ऐसा लगता है कि विभिन्न एजेंसियों और सुरक्षा बलों में तालमेल नहीं था। गृह मंत्री ने पहले ही दिन आपरेशन को सफल बताते हुए इसके खत्म होने का ऐलान कर दिया और फिर उन्हें अपने इस ट्वीट को हटाना पड़ा। यही बताता है कि आपरेशन को कितने अकुशल तरीके से अंजाम दिया गया। “
माकपा ने कहा है कि मोदी सरकार पाकिस्तान से बात जारी रखे और चरमपंथी-जेहादी समूहों को अपना मनचाहा न करने दे। इसमें कहा गया है कि पठानकोट के मामले ने वार्ता में आतंकवाद के मुद्दे को उठाने पर सरकार का हाथ मजबूत ही किया है।
संपादकीय में लिखा गया है कि इस हमले से साबित हुआ है कि पाकिस्तानी राज्य जेहादी समूहों से निपटने में लगातार नाकाम रहा है और इन समूहों को वहां के खुफिया और सुरक्षा प्रतिष्ठानों का संरक्षण भी मिला हुआ है।
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