नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। फिल्म जगत में काम करने के बावजूद मुंबई में न रहते हुए कोलकाता में रह रहीं अभिनेत्री एकावली खन्ना कोई युवा कलाकार नहीं, बल्कि दो बच्चों की मां हैं।
नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। फिल्म जगत में काम करने के बावजूद मुंबई में न रहते हुए कोलकाता में रह रहीं अभिनेत्री एकावली खन्ना कोई युवा कलाकार नहीं, बल्कि दो बच्चों की मां हैं।
अपने करियर में वैश्या से लेकर रूढ़िवादी पाकिस्तानी महिला का किरदार निभाने वाली एकावली का मानना है कि भारतीय सिनेमा की नई पीढ़ी परिपक्व अभिनेत्रियों को तवज्जो दे रही है।
एकावली ने फिल्म जगत में अपने अब तक के सफर में निभाए गए इन किरदारों से रूढ़िवादी सोच को तोड़ा है। आईएएनएस के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने कई चीजों को साझा किया।
अपनी तीन फिल्मों ‘अंग्रेजी में कहते हैं’, ‘बाइस्कोपवाला’ और ‘वीरे दी वेडिंग’ की रिलीज का इंतजार कर रहीं एकावली ने कहा, “हिंदी फिल्म जगत बेहद शानदार है। अगर उसे आपकी जरूरत है, तो वह आपको खोज निकालेगी।”
एकावली की ये तीनों फिल्में एक ही माह रिलीज होंगी। वह स्वयं को भाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें अलग-अलग किरदार निभाने को मिले हैं।
नीला मदहाब की फिल्म ‘कौन कितने पानी में’ के जरिए बड़े पर्दे पर कदम रखने वाली एकावली ने इस फिल्म में एक वेश्या का किरदार निभाया था। इसके बाद, ‘जेड प्लस’ में उन्होंने एक देहाती विधवा और ‘डियर डैड’ में आधुनिक भारतीय महिला का किरदार निभाया।
नोर्वे की फिल्म ‘वट विल पीपुल से’ में एकावली ने एक रूढ़िवादी पाकिस्तानी महिला का किरदार निभाया। उन्होंने कहा, “अच्छे निर्देशक और अच्छे कास्टिंग निर्देशकों की चिंता पर्दे पर नजर आने वाली आपकी उम्र पर रहती है। इसमें एक कलाकार के तौर पर आपकी क्षमता और किरदार में आपके भाव देखे जाते हैं। उन्हें इस बात की चिंता नहीं होती कि आप दो बच्चों की मां हैं और आप कोलकाता में रहती हैं या मुंबई में।”
एकावली ने कहा कि यह बात पूरी तरह से झूठी है कि अगर आप युवा हैं, तो ही आप एक अभिनेता या अभिनेत्री के किरदार के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
उन्होंने कहा, “अभिनेता के इर्द-गिर्द घूमने वाली फिल्मों में अभिनेत्रियों की भूमिका थोड़ी सी ही रहती है। यह अच्छी बात है कि पिछले कुछ वर्षो में लेखक अच्छी कहानियां लिख रहे हैं, जिसमें महिलाओं के किरदार अहम बनाए गए हैं। विशेष रूप से 30 और 40 की उम्र में जी रहीं परिपक्व महिला कलाकारों के लिए।”
एकावली ने कहा, “मेरा यह भी मानना है कि अनुभव एक कलाकार के प्रदर्शन में गहरे आयाम जोड़ता है। ऐसे में चीजें बदल रही हैं। भारतीय टेलीविजन से अलग भारतीय सिनेमा की नई पीढ़ी परिपक्व महिला कलाकारों को अधिक तवज्जो दे रही है। भारतीय टेलीविजन में 24 साल की महिला को 22 साल की युवती के मां के किरदार में दिखाया जाता है।”
अभिनेत्री एकावली का जीवन कई उतार-चढ़ाव से गुजर रहा था, जब उन्होंने अभिनय जगत की ओर अपना रुख किया।
उन्होंने कहा, “उस समय मैं खुद को संभाले रखने का संघर्ष कर रही थी और उसी दौरान मुझे स्वयं को साबित करने की जरूरत महसूस हुई। इसलिए, मैं उतार-चढ़ाव और शोर-शराबे की जिंदगी से आगे बढ़ गई। दर्द और परेशानियां बेहद अलग तरीके आपको खुद की क्षमताओं को पहचानने में मदद करते हैं।”
सिनेमा में कलाकार की पहचान हासिल करना एकावली के लिए एक थेरेपी की तरह रहा। अपने बच्चों को अकेले पाल रही अभिनेत्री ने शूटिंग शुरू की और हर मिनट कुछ नया सीखने में गुजारा।
एकावली का कहना है कि जहां एक ओर मुंबई उनके मन और क्रियात्मकता को निखारता है, वहीं कोलकाता उनकी आत्मा निखारता है।
फिल्म ‘अंग्रेजी में कहते हैं’ में एकावली को एक ऐसी महिला के किरदार में देखा जाएगा, जो निराधार शादी-शुदा जीवन व्यतीत कर रही है।
इसके अलावा, ‘बाइस्कोपवाला’ और ‘वीरे दी वेडिंग’ में एकावली को अतिथि भूमिका में देखा जाएगा। इस बारे में उन्होंने कहा, “अतिथि भूमिका करना भी जरूरी है। अगर यह छोटा किरदार भी है और लोग इसे पसंद करते हैं, तो इसमें भी एक अलग संतुष्टि है।”
dharmpath.com dharmpath