पर्वतीय संस्कृति से जुड़कर समृद्ध की जा सकती है विकास की दिशा : योगी

लखनऊ, 21 जनवरी (आईएएनएस/आईपीएन)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पर्वतीय संस्कृति, कला और वहां के अध्यात्म व धर्म से जुड़कर विकास की दिशा को और समृद्धि प्रदान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की धरती देवभूमि है और उसे इसी रूप में देश व दुनिया में देखा जाता है।

लखनऊ, 21 जनवरी (आईएएनएस/आईपीएन)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पर्वतीय संस्कृति, कला और वहां के अध्यात्म व धर्म से जुड़कर विकास की दिशा को और समृद्धि प्रदान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की धरती देवभूमि है और उसे इसी रूप में देश व दुनिया में देखा जाता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय सुरक्षा में भी गढ़वाल और कुमाऊं रेजिमेण्ट ने हमेशा योगदान दिया है। उत्तराखंड के नवयुवक बड़ी संख्या में देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तैयार रहते हैं।

मुख्यमंत्री रविवार को पर्वतीय महापरिषद लखनऊ द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिग मेले के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने इस आयोजन के लिए पर्वतीय महापरिषद के सभी पदाधिकारियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि बेहतर होगा कि इस आयोजन में उत्तराखण्ड के कलाकारों और वहां की उभरती प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जाए। इससे लोक कला, लोक संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्डवासियों को वहां की परम्परा और संस्कृति के साथ-साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए भी हर सम्भव प्रयास करने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने पहाड़ के गांवों से पलायन और वहां के खालीपन की चर्चा करते हुए कहा कि लोगों को अपनी जन्मभूमि, परम्पराओं तथा संस्कृति से जुड़ना होगा। उन्होंने कहा कि पहले की अपेक्षा पर्वतीय क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं में बढ़ोत्तरी हुई है और जन-जीवन सुगम हुआ है। पर्वतीय क्षेत्रों में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए तथा योग की परम्परा को आगे बढ़ाया जाए।

योगी ने आह्वान किया कि उत्तराखण्ड के लोग उत्तर प्रदेश और देश के साथ उत्तराखण्ड के विकास के लिए भी सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन की अपार सम्भावनाएं हैं। वहां पर ईको और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर समृद्धि लायी जा सकती है। इसी प्रकार हेल्थ टूरिज्म की भी सम्भावनाएं हैं। जगह-जगह वेलनेस सेण्टर संचालित किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हेल्थ टूरिज्म पर यदि ध्यान दिया जाए, तो उत्तराखण्ड पूरी दुनिया में सबसे आगे होगा। उत्तराखण्ड की परम्परा और संस्कृति के बारे में पर्यटकों को जानकारी देकर पर्यटन उद्योग को समृद्ध किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी-बूटी के क्षेत्र में भी उत्तराखण्ड का विशेष योगदान है, जिसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ, ऋषिकेश, हरिद्वार जैसे स्थानों को पूरे देश और दुनिया में ऐतिहासिक, धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व है। इन स्थलों को और विकसित करके हम सब अपनी विरासत और परम्परा को अक्षुण्ण रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर उत्तर प्रदेश का भवन बनाए जाने की कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने उत्तराखण्डवासियों और उत्तराखण्ड को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हर सम्भव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तरायणी कौथिग मेला उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। यह सूर्य के मकर संक्रान्ति में प्रवेश और दक्षिणायन से उत्तरायण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाता है। इस मेले का धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि पर्वतीय महापरिषद का आयोजन पर्वतीय समाज के लोगों को अपनी संस्कृति और परम्परा से जोड़े रखने में उल्लेखनीय भूमिका निभाता रहेगा।

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