‘पर्सनल लॉ’ में हस्तक्षेप के खिलाफ सभी मुस्लिम संप्रदाय एकजुट

मुंबई, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। असाधारण एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए सोमवार को सभी मुस्लिम संप्रदायों के विद्वानों और मौलवियों ने समान नागरिक संहिता लागू करने के सरकार के प्रयास की निंदा की।

सुन्नी, शिया, बरेलवी, देवबंदी और अहलेहादी संप्रदायों के विद्वानों और मौलिवियों ने ‘पर्सनल लॉ में सरकारी हस्तक्षेप’ का उल्लेख करते हुए अपने-अपने विरोध दर्ज कराए।

गहन विचार मंथन सत्र के बाद नेताओं ने संयुक्त वक्तव्य जारी कर तीन तलाक और अन्य प्रथाओं के संबंध में सरकार के प्रस्तावों पर यह कहते हुए रोष जाहिर किया कि यह उनके ‘पर्सनल लॉ’ का उल्लंघन करेगा।

मुस्लिम विद्वतजनों ने कहा, “मुस्लिम ‘पर्सनल लॉ’ में किसी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समाज सुधार और लैंगिक न्याय के नाम पर समान नागरिक संहिता लागू करने का कोई प्रयास प्रति नुकसानदायक सिद्ध होगा।”

अखिल भारतीय उलेमा परिषद के अध्यक्ष जहरुद्दीन खान ने समान नागरिक संहिता थोपने की साजिश के रूप में तीन तलाक पर रोक लगाने की पहल की निंदा की।

उन्होंने चेतावनी दी कि समान नागरिक संहिता बांटने वाला है और इससे सामाजिक अशांति उत्पन्न होगी।

दारुल उलूम मोहमदिया के अध्यक्ष सैयद एम.के. अशरफ ने कहा, “मुसलमानों की इस स्थिति का सरकार को सम्मान करना चाहिए, न कि सजिश के तहत इसे जबरन खत्म करना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि तीन तलाक और बहुविवाह पर रोक की मांग करने वाले अल्पसंख्यक समुदाय का एक छोटा समूह है, जो अधिकांश मुसलमानों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।

ऑल इंडियन उलेमा एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना सैयद अतहर अली ने सरकार से सभी नागरिकों की मान्यताओं और धर्म में हस्तक्षेप करने से परहेज करने का अनुरोध किया।

हालिया पहल ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड द्वारा तीन तलाक पर रोक के खिलाफ कड़ी आपत्ति जाहिर करने के थोड़े दिनों बाद हुई है।

मुंबई में बैठक की अध्यक्षता मौलाना अशरफ ने की।

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