पाकिस्तान की नीति है आतंकवाद : अफगानी अध्यक्ष

इंदौर, 18 फरवरी (आईएएनएस)। दक्षिण एशियाई देशों के लोकसभा अध्यक्षों के शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान की गैर मौजूदगी को अफगानिस्तान ने ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए कहा कि इस्लामाबाद ने आतंकवाद को अपनी नीति के रूप में अपना लिया है, जो उसके लिए एक गंभीर खतरा साबित होगा।

इंदौर, 18 फरवरी (आईएएनएस)। दक्षिण एशियाई देशों के लोकसभा अध्यक्षों के शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान की गैर मौजूदगी को अफगानिस्तान ने ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए कहा कि इस्लामाबाद ने आतंकवाद को अपनी नीति के रूप में अपना लिया है, जो उसके लिए एक गंभीर खतरा साबित होगा।

नेशनल असेंबली ऑफ अफगानिस्तान के अध्यक्ष अब्दुल रऊफ इब्राहिमी ने आईएएनएस से कहा, “पाकिस्तान का शिखर सम्मेलन में शिरकत न करना दुर्भाग्यपूर्ण है। हम इसका कारण नहीं जानते, इसका वे ही बेहतर जवाब दे सकते हैं। अगर पाकिस्तान शिखर सम्मेलन में शिरकत करता, तो पड़ोसी देश होने के नाते हमें खुशी होती।”

दक्षिण एशिया के लिए आतंकवाद को गंभीर खतरा करार देते हुए इब्राहिमी ने कहा कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को अपनी नीति के रूप में अपना लिया है।

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान सहित समस्त दक्षिण एशियाई मुल्कों के लिए आतंकवाद एक गंभीर खतरा बना हुआ है, लेकिन दुर्भाग्यवश पाकिस्तान के हुक्मरान हमेशा आतंकवाद का समर्थन करते रहे हैं। पाकिस्तान की यह नीति दक्षिण एशियाई क्षेत्र के हित में नहीं है। आने वाले वक्त में यह पाकिस्तान के लिए गंभीर खतरा बनने जा रहा है।”

इब्राहिमी ने यह भी कहा कि आतंकवाद अफगानिस्तान के लिए बेहद खतरनाक है।

उन्होंने कहा, “हम क्षेत्र में लोगों के जीवन, सुरक्षा तथा राजनीतिक क्षेत्र में सुधार के लिए भारत के सहयोग का आह्वान करते हैं। हमारा मानना है कि यह दक्षिण एशियाई लोगों के हित में है।”

अफगानिस्तान के प्रति दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हुए अध्यक्ष ने कहा, “भारत एक बड़ा मुल्क है और क्षेत्र में यह एक प्रभावी तथा प्रभावशाली ताकत है। भारत अफगानिस्तान का मित्र रहा है और बीते 15 वर्षो के दौरान उसने दो अरब डॉलर की मदद देकर अफगानिस्तान का समर्थन किया।”

उन्होंने कहा, “हम भारत से चाहते हैं कि यह रिश्ता और मजबूत तथा विकसित हो। हम सुरक्षा में सुधार चाहते हैं और दोनों देशों के बीच के संबंधों को और आगे ले जाना चाहते हैं। उम्मीद है कि भविष्य में यह जारी रहेगा।”

पाकिस्तानी सरजमीं पर पनपने वाले आतंकवाद के खिलाफ अफगानिस्तान चिंता जता चुका है और अपने पड़ोसी देश पर सीमांत इलाकों में तालिबान को पालने पोसने का आरोप लगाया है।

उल्लेखनीय है कि इस्लामाबाद में बीते साल नवंबर में होने वाले दक्षेस सम्मेलन का भारत के साथ अफगानिस्तान ने बहिष्कार किया था, जिसके बाद बांग्लादेश तथा भूटान ने भी बहिष्कार का समर्थन किया।

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