धुले (महाराष्ट्र), 21 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान द्वारा शनिवार को रिहा किए गए भारतीय सेना में सिपाही चंदू बाबूलाल चव्हाण के परिवार में और उत्तरी महाराष्ट्र में स्थित उनके गांव बोहिवीर में जश्न का माहौल है।
चंदू के परिवार वालों ने उनकी सकुशल वापसी के लिए अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
बड़ी संख्या में बोहिवीर वासी चंदू के परिवार वालों को बधाई देने के लिए घरों से बाहर निकल आए, वहीं उनके परिवार वालों की खुशी का पारावार नहीं है। वे एक साथ खुश हैं तो खुशी के मारे रो भी रहे हैं।
चव्हाण के बड़े भाई भूषण ने कहा, “हम सरकार के दिल से शुक्रगुजार हैं कि वे चंदू को सकुशल वापस ले आएं। उसे घर वापस लाने के लिए की गई कोशिशों के लिए हम रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे के हमेशा ऋणी रहेंगे।”
चव्हाण की शादीशुदा बहन रुपाली पाटिल आंखों से बहती धारा के बीच कहती हैं, “यह अश्विसनीय है और हम अभी भी खबर पर विश्वास नहीं कर पा रहे। हम बेहद खुश हैं..हमारे लिए जैसे सारे त्योहार, दिवाली, होली आज एकसाथ आ गए हैं। इतने लंबे समय के बाद जब वह (चंदू) घर वापस आएगा तो हम जश्न मनाएंगे।”
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान के रक्षा एवं सीमा अधिकारियों ने शनिवार को वाघा-अटारी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित संयुक्त सुरक्षा चौकी पर चव्हाण को भारतीय सीमा सुरक्षा बल को सौंप दिया।
चव्हाण पिछले वर्ष सितंबर से ही पाकिस्तान के कब्जे में थे। जम्मू एवं कश्मीर के मेंढर में 37 राष्ट्रीय राइफल्स की चौकी पर तैनात 22 वर्षीय चव्हाण 29 सितंबर को भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक के ठीक बाद गलती से नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तान में प्रवेश कर गए थे।
चंदू के पाकिस्तानी सेना के कब्जे में चले जाने की खबर पाकर उनकी दादी को दिल का दौरा पड़ गया था और कुछ ही दिन बाद मौत हो गई थी।
धुले संसदीय सीट से निर्वाचित भामरे चंदू के पाकिस्तानी सेना के कब्जे में जाने के बाद से लगातार उनके परिवार के संपर्क में थे।
10 दिन पहले मुंबई में एक समारोह के दौरान भामरे ने चंदू की जल्द रिहाई की संभावना व्यक्त की थी, हालांकि तब उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया था कि चंदू की रिहाई कब तक हो सकती है।
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