भोपाल, 30 सितम्बर (आईएएनएस)। पितरों के स्मरण और उन्हें जल देने का पर्व पितृपक्ष के अंतिम दिन पितृमोक्ष अमावस्या पर मध्य प्रदेश के प्रमुख धर्मस्थलों की नदियों और विभिन्न स्थानों के जल स्त्रोतों पर शुक्रवार को अनुष्ठानों का दौर चलता रहा। हिंदू धर्मावलंबियों ने तर्पण कर अपने पूर्वजों का स्मरण किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक पखवाड़े तक चले पितृपक्ष के अंतिम दिन अमावस्या को पितरों की विदाई होती है। इस दिन पिंडदान से लेकर विशेष अनुष्ठान के साथ पुण्य अर्जित करने के लिए गरीबों को दान दिया जाता है। आज शुक्रवार को पितरों की विदाई का अंतिम दिन है।
राजधानी के विभिन्न जल स्त्रोतों पर सुबह से ही धर्मावलंबियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था और पुरोहितों की मौजूदगी में तर्पण के बाद पुरखों को विदाई दी गई, वहीं देवालयों में पूजा अर्चना का दौर चलता रहा।
महाकाल की नगरी उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर तर्पण के बाद बाबा महाकाल के दर्शन का दौर चलता रहा। मान्यता है कि अमावस्या को रामघाट पर पिंडदान करने से गया में किए गए अनुष्ठान के बराबर पुण्य मिलता है। कहा जाता है कि रामघाट पर भगवान राम ने अपने पिता दशरथ का पिंडदान किया था।
इसी तरह ओंकारेश्वर में नर्मदा के तट पर सुबह से ही श्रद्घालुओं का मेला लगा रहा और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच लोगों ने अपने-अपने पितरों को जल दिए। साथ ही विशेष पूजा-अर्चना भी की गई। होशंगाबाद में भी नर्मदा नदी के सेठानी घाट पर स्नान तर्पण के लिए सुबह से ही श्रद्घालुओं का तांता लगा रहा। इसके अलावा ओरछा में बेतवा नदी के घाटों पर भी पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा।
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