पुरस्कार, मान्यता के लिए कोई जुगाड़ न करें युवा : अशोक वाजपेयी

नई दिल्ली, 22 नवंबर (आईएएनएस)। कवि, कथाकार एवं आलोचक माधव मुक्तिबोध की जयंती के अवसर पर दो दिवसीय ‘युवा 2017’ कार्यक्रम में देश के करीब 30 शहरों के 50 से ज्यादा हिंदी के युवा लेखक हिस्सा ले रहे हैं। इस मौके पर प्रख्यात लेखक अशोक वाजपेयी ने कहा कि युवाओं को आत्मरति से बचना चाहिए और उन्हें पुरस्कारों, मान्यता के लिए कोई जुगाड़ नहीं करना चाहिए।

अशोक वाजपेयी ने कहा, “जीवन और सच्चाई साहित्य से हमेशा बड़े और व्यापक होते हैं। युवा लेखकों को जो स्वतंत्रता मिली हुई हैं वह उनके पुरखों का अर्जन है, उनका नहीं। युवाओं को आत्मरति से बचना चाहिये और उन्हें पुरस्कारों, मान्यता के लिए कोई जुगाड़ नहीं करना चाहिये।”

कार्यक्रम में मुक्तिबोध की रचना ‘अंधेरे में’ पर लेखकों ने अपने विचार रखे। गीत चतुर्वेदी ने कहा कि मुक्तिबोध हिंदी कविता पर विशाल स्पॉटलाइट की तरह हैं जो बाहर से अंदर उजाला लाती है। वे हिंदी रचना संसार की संधि बिंदु हैं। यही कारण है कि हिंदी का रचना संसार मुक्तिबोध के पहले और मुक्तिबोध के बाद देखा जाता है।

संतोष चतुर्वेदी ने कहा, “अंधेरे की तरफ जाने से सब बचना चाहते हैं। मुक्तिबोध ने उस दिशा में जाने का जोखिम उठाया। किसी भविष्यवक्ता की तरह साफगोई से समाज की असंगतियों को अपनी कविता में बयां किया। उनका सपना था कि समाज का अंतिम व्यक्ति भी गरिमा से जी सके, जो आज भी अधूरा है। “

कार्यक्रम में ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: कटौतियां, चुप्पियां, चतुराई और चालाकियां’ पर परिचर्चा भी हुई। इस दौरान हिंदी के कई नामचीन लेखक मौजूद थे।

दो दिवसीय कार्यक्रम में गुरुवार को निर्मल वर्मा की मलयज की आलोचना से शुरुआत होगी। इसके बाद कृष्ण बलदेव वैद की ‘उसका बचपन’, अ™ोय की ‘असाध्य वीणा’ पर लेखक अपने अनुभव साझा करेंगे। ‘हम क्या याद करे और क्या भूल रहे हैं’ विषय पर परिचर्चा भी होगी। दो दिनों की चर्चाओं पर आधारित एक किताब ‘कालजयी एवं युवा’ भी जारी की जाएगी।

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