मुंबई, 18 जुलाई (आईएएनएस)। फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ की निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव का मानना है कि ज्यादातर काम साहित्य पुरुषों के नजरिये से लिखे गए हैं, जो अनुचित है।
कल्चर मशीन के डिजिटल चैनल ब्लश के ‘सो बेसिकली’ सीरीज के हिस्से के रूप में मंगलवार को ‘7 गंदी कहानियां’ नाम के वीडियो में श्रीवास्तव और अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा, आहाना कुमरा और प्लाबिता बोरठाकुर नजर आईं।
वीडियो में वे भारत मशहूर लेखकों द्वारा लिखे काम साहित्य को पढ़ रही हैं।
श्रीवास्तव ने एक बयान में कहा, “ज्यादातर काम साहित्य पुरुषों के नजरिये से लिखे गए हैं। ये कभी-कभार ही महिलाओं के नजरिए से लिखे गए। लेकिन सेक्स की कहानियों का अभिप्राय सिर्फ पुरुषों से होना अनुचित है।”
श्रीवास्तव का मानना है कि महिलाओं को अपने तरीके से रोमांस करना चाहिए, जो उन्हें संतोष व सुकून दे।
कोंकणा ने कहा, “यह वेब फिल्म आज की महिलाओं की बोल्ड अभिव्यक्ति है कि वे क्या हैं और क्या महसूस करती हैं। इतनी दिलचस्प अवधारणा पर ब्लश की टीम के साथ शूटिंग करना शानदार अनुभव रहा।”
फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ को प्रमाण-पत्र पाने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी। सेंसर बोर्ड ने इसे प्रमाण-पत्र देने से मना कर दिया था, लेकिन अपीलीय न्यायाधिकरण से इसे हरी झंडी मिल गई थी।
फिल्म की कहानी चार महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जो खुलकर जीना चाहती हैं।
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