पूर्वोत्तर में केंद्रीय बलों की तैनाती नहीं घटेगी

नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने मंगलवार को कहा कि पूर्वोत्तर में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों की संख्या घटाने की कोई योजना नहीं है।

मंत्री ने लोकसभा में यह भी कहा कि विद्रोहियों से लड़ने के लिए केंद्र सरकार क्षेत्र में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की तैनाती कर राज्य सरकार के प्रयासों में मदद कर रही है।

उन्होंने एक लिखित जवाब में कहा कि सीएपीएफ क्षेत्र में उन प्रतिष्ठानों तथा बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को सुरक्षा प्रदान कर रहा है, जिन्हें खतरा है।

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में तैनात केंद्रीय बलों की संख्या में कमी करने का कोई प्रस्ताव नहीं है और सुरक्षा संबंधित खर्चो का वहन राज्य सरकारें करेंगी।

सरकार द्वारा किए गए अन्य उपायों में भारतीय रिजर्व बटालियनों को मंजूरी देना, अवैध संगठनों को प्रतिबंधित करना, सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम के तहत अशांत इलाके की घोषणा तथा एकीकृत कमान संरचना के लिए सूचनाएं जारी करना शामिल हैं।

मंत्री के मुताबिक, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (एनएससीएन) के तीन गुटों के साथ केंद्र सरकार संघर्ष विराम की समीक्षा कर रही है।

उन्होंने कहा, “एनएससीएन-खापलांग ने मार्च में संघर्ष विराम का एक तरफा उल्लंघन किया और हिंसक घटनाओं में भागीदारी की।”

मंत्री ने कहा, “एनएससीएन-आईएम, एनएससीएन-खोले कितोवी तथा एनएससीएन-रिफॉर्मेशन के साथ हालांकि संघर्ष विराम जारी रहेगा।”

केंद्र सरकार ने यहां सोमवार को एनएससीएन-आई-एम के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया।

रिजिजू ने कहा, “असम में युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (वार्ता समर्थक), नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड-प्रोग्रेसिव, एनडीएफबी (रंजन दयमारी) तथा कार्बी लॉन्गरी एनसी हिल्स लिबरेशन फ्रंट के साथ त्रिपक्षीय वार्ता जारी है।”

गुवाहाटी में 11 जुलाई को मुख्यमंत्रियों की बैठक में उन्होंने कहा था कि क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति पर चर्चा की गई है।

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