लखनऊ, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री ड़ अखिलेश दास गुप्ता का बुधवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 56 वर्षीय दास का निधन आठ विक्रमादित्य मार्ग स्थित उनके आवास पर ही हुआ। परिवारिक सदस्यों को उन्हें अस्पताल ले जाने का मौका भी नहीं मिल सका। उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही भाजपा के पदाधिकारियों ने भी शोक व्यक्त किया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बयान जारी कर पूर्व केन्द्रीय मंत्री अखिलेश दास के निधन पर दु:ख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शान्ति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है।
इधर, अखिलेश दास के निधन की खबर मिलते ही उनके आवास पर नेताओं और अफसरों का तांता लग गया। कांग्रेस समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास के पुत्र अखिलेश दास खेल प्रशासक और शिक्षाविद् के तौर भी जाने जाते थे।
लखनऊ के मेयर के तौर पर अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने वाले दास लखनऊ में स्थापित बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय के चांसलर और भारतीय बैंडमिंटन एकेडमी के अध्यक्ष भी थे। इसके अलावा उन्होंने इंजीनियरिंग, मेडिकल व प्रबंधन से संबंधित कई शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की।
तीन बार राज्यसभा सदस्य रहे दास उप्र विधानसभा चुनाव से पहले जनवरी 2017 में कांग्रेस में वापस आ गए थे। कांग्रेस से ही उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। हाल ही में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि कांग्रेस उनका घर है। कांग्रेस छोड़कर बसपा में जाना उनके जीवन की भूल थी। अब मरते दम तक कांग्रेस में ही रहेंगे।
इससे पहले 12 मई 1993 से 30 नवंबर 1995 तक वह लखनऊ के मेयर रहे थे। फिर 26 नवंबर 1996 से 25 नवंबर 2014 तक वह राज्यसभा के सांसद रहे। ड़ मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली संप्रग सरकार में वर्ष 2006-2008 तक वह इस्पात राज्यमंत्री के पद पर रहे।
2014 में बसपा से राज्यसभा का टिकट न मिलने से नाराज अखिलेश ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इस दौरान अखिलेश दास ने बसपा प्रमुख पर टिकट बेचने का गंभीर आरोप भी लगाया था। फिलहाल कुछ समय पहले उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी।
अखिलेश दास उप्र के मुख्यमंत्री रहे बनारसी दास गुप्ता के बेटे थे। 2014 के अंत में उन्होंने यह कहकर बसपा छोड़ दी थी कि मायावती ने दोबारा राज्यसभा सांसद बनाने के लिए उनसे 100 करोड़ रुपये मांग की थी।
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