नई दिल्ली, 15 नवंबर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास आवंटित करने से संबंधित कानून को चुनौती देने वाली एक याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ मंगलवार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे की पीठ ने एक गैर सरकारी संगठन लोक प्रहरी लोक प्रहरी के महासचिव और पूर्व नौकरशाह एस. एन. शुक्ला की ओर से दायर याचिका पर यह नोटिस जारी किया।
याचिका में पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास आवंटित करने के लिए कानून में किए गए संशोधन को चुनौती दी गई है।
गौरतलब है कि कानून में संशोधन कर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेश को निष्प्रभावी कर दिया गया, जिसमें शीर्ष अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास आवंटित करने पर रोक लगा दी थी।
शीर्ष अदालत द्वारा एक अगस्त को दिए गए फैसले के एक सप्ताह के अंदर यह संशोधन किया गया।
उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन, भत्ते एवं प्रकीर्ण उपबंध) (संशोधन) अधिनियम-2016 के अनुसार, “उत्तर प्रदेश के किसी पूर्व मुख्यमंत्री के आवेदन पर उन्हें राज्य संपत्ति विभाग के तहत नियमानुसार मासिक किराए पर सरकारी आवास आवंटित किया जाएगा।”
इसके अलावा विधानसभा में राज्य संपत्ति विभाग के के अधीन आने वाले भवनों का आवंटन, 2016 शीर्षक से पेश विधेयक में पूर्व मुख्यमंत्रियों, राज्य सरकार के कर्मचारियों और अधिकारियों और अखिल भारतीय सेवा व न्यायिक सेवा के अधिकारियों, पत्रकारों समेत उन सभी अधिकारियों, संघों, न्यासों और राजनीतिक दलों को कतिपय शर्तो के साथ देने की व्यवस्था है, जिन्हें राज्य संपत्ति विभाग द्वारा कार्यकारी नियमों और अधिनियमों के उपबंधों के तहत अब तक भवन आबंटित किए जाते रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि अदालत ने राज्य के छह पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपने-अपने सरकारी आवास अगले दो महीने में खाली करने का निर्देश दिया था।
ज्ञात हो कि मुलायम सिंह यादव, मायावती, नारायण दत्त तिवारी, राम नरेश यादव, मौजूदा केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और राजस्थान के मौजूदा राज्यपाल कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के ऐसे पूर्व मुख्यमंत्री हैं जिनके नाम आज भी सरकारी आवास आवंटित हैं।
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