चेन्नई, 6 जून (आईएएनएस)। अपने समय में भारत के सबसे ज्यादा सम्मानित सांसदों में शुमार किए जाने वाले इरा सेझियान का मंगलवार को 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह अस्वस्थ चल रहे थे।
इरा सेझियान ने यहां से 140 किलोमीटर दूर वेल्लोर में अंतिम सांस ली। वह अपने विविधता पूर्ण लेखन के लिए भी जाने जाते थे।
द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) के टिकट पर इरा पहली बार 1962 में लोकसभा पहुंच थे। काम में लगन से उन्होंने हमेशा सभी से प्रशंसा पाई।
28 अप्रैल 1923 में थानजावुर जिले में जन्मे इरा ने स्नातक की पढ़ाई के बाद अपने बड़े भाई वी.आर. नेदुनचेंझियान के साथ डीएमके का दामन थामा।
इरा, पेरामबालुर से सांसद बने और सदन में पहुंचे। वह दो दशकों तक सासंद रहे। इसमें राज्य सभा का कार्यकाल भी शामिल है।
विकेन्द्रीकरण और ईमानदारी के लिए आवाज बुलंद करने वाले डीएमके के यह नेता अपनी सरलता के लिए जाने जाते थे। उन्हें विद्वान माना जाता था।
जय प्रकाश नारायण के सहयोगी रहे इरा ने इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का जमकर विरोध किया था। दिल्ली पुलिस उन्हें पकड़ने आई तो वह उसे चकमा देकर निकल गए थे।
लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने एक बार कहा था, “मैंने काफी कम सांसद देखे हैं जो इरा जितने ज्ञानी, मेहनती, क्षमतावान और प्रतिबद्ध हों।”
इरा ने 2001 में सक्रिय राजनीति छोड़ दी थी लेकिन वह राजनीति और राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखते रहते थे।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के.पलनीस्वामी ने उनके निधन पर शोक संदेश में कहा कि इरा ने संसद में अपने शानदार भाषाणों से सभी का दिल जीता।
डीएमके नेता एम.के. स्टालिन ने कहा कि इरा द्रविड़ आंदोलन के सबसे वरिष्ठन नेताओं में से एक थे।
पीएमके संस्थापक एस. रामदॉस ने भी उनके निधन पर शोक जताया है।
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