जी-20 शिखर सम्मेलन 2016 का आयोजन चार से पांच सितंबर के बीच हांगझोऊ शहर में होगा।
यह घोषणा संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उच्चस्तरीय हस्ताक्षर समारोह के दौरान की गई। इस दौरान पूरे विश्व के 171 देशों ने मिलकर एक अंतर्राष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र जलवायु प्रारूप संकल्प में शामिल पक्षों में से कम से कम 55 पक्ष, जो कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 55 फीसदी भागीदारी के लिए जिम्मेदार हैं, समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अपने देशों में इसके क्रियान्वयन की पहल जब शुरू कर देंगे, तो उसके 30 दिनों के भीतर यह समझौता प्रभावी हो सकता है।
इस समझौते के एक प्रमुख पक्ष चीन ने वादा किया है कि वह 2005 की तुलना में 2030 तक प्रति जीडीपी कार्गन उत्सर्जन में 60-65 प्रतिशत कटौती करेगा। इसके साथ ही प्राथमिक ऊर्जा खपत में गैर जीवाश्म ईंधन के स्रोतों में 20 प्रतिशत की वृद्धि करने की भी बात चीन ने कही है।
हस्ताक्षर समारोह में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के विशेष दूत झांग गाओली ने कहा, “चीन के लोग अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करते हैं। हम कड़ी मेहनत और ईमानदारी से इस पेरिस समझौते को लागू करने की कोशिश करेंगे।”
उन्होंने कहा, “हम एक राष्ट्रीय उत्सर्जन व्यापार बाजार की शुरुआत करेंगे। साथ ही पर्यावरण संरक्षण तथा सभी लक्ष्यों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सख्त जवाबदेही प्रणाली स्थापित करेंगे।”
झांग ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर भी बल दिया।
उन्होंने कहा, “चीन पेरिस समझौते की आगामी वार्ताओं में सक्रिय रूप से भाग लेगा। हम जलवायु परिवर्तन पर दक्षिण-दक्षिण सहयोग को अधिक गहरा बनाएंगे।”
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