नई दिल्ली, 26 नवंबर (आईएएनएस)। गायक ध्रुव सांगरी का कहना है कि भारतीय फिल्मों ने पिछले कुछ वर्षो में ना केवल युवाओं के लिए सूफी संगीत को पुन: परिभाषित किया है बल्कि शास्त्रीय संगीत में लोगों की रुचि को भी पुन: जीवित किया है।
सांगरी ने इस महीने द सूफी रूट में प्रस्तुति दी। इसका मकसद शांति के संदेश का प्रसार था। सांगरी ने महान कव्वाल और शास्त्रीय गायक उस्ताद नुसरत फतेह अली खान, दिल्ली घराना के उस्ताद इकबाल अहमद खान और रामपुर-सहवासन घराने के उस्ताद गुलाम सादिक खान से संगीत सीखा है।
ध्रुव ने आईएएनएस को ईमेल के जरिए दिए साक्षात्कार में कहा, “सूफी-भक्ति आंदोलन और इसकी संस्कृति हमेशा शांति, प्रेम, मानवता और सार्वभौमिकता के लिए खड़ी होती रही है। इस परंपरा के दूत के रूप में यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने संगीत की अभिव्यक्ति के माध्यम से नई पीढ़ी के दिलों में इसे जीवित रखें।”
सूफी संगीत में बॉलीवुड के योगदान पर सांगरी ने कहा, “हालांकि हम यह तर्क दे सकते हैं कि बॉलीवुड ने शायद एक हद तक पारंपरिक संगीत और कविता की अहमियत को कम किया है, लेकिन सूफी संगीत के कालातीत संदेश का सार आज की पीढ़ी तक इससे पहुंचा है। वास्तव में पहले से कहीं ज्यादा लोग सूफी संगीत से जुड़ रहे हैं। इसलिए यह एक महत्वपूर्ण योगदान है।”
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