फॉक्स लाइफ पर ‘ग्रेट एस्केप..’ हिमालय की यात्रा पर ले जाएगा

नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। लाइफस्टाइल चैनल फॉक्स लाइफ पर ग्रेट एस्केप.. नए सीजन के साथ लौट आया है। इस बार बचपन के दोस्त कुणाल कपूर और साइरस साहूकार हिमालय के कम विख्यात कस्बों एवं गांवों में रोड ट्रिप पर निकलेंगे। ग्रेट एस्केप में इन दोनों साथी कलाकारों को बरसों पुरानी अपनी दोस्ती को जीते हुए दिखाया जायेगा। ये दोनों हंसी, मजाक, रोमांच आदि से भरपूर एक यात्रा पर निकल रहे हैं।

पैराग्लाडिंग से लेकर ‘हिंदुस्तान का आखिरी ढाबा’ पर भोजन का आनंद उठाने, दुनिया के सबसे ऊंचे डाकघर से खुद को पत्र डालने से लेकर काइ मोनास्ट्री में 150 भिक्षुओं को भोजन देने तक, ग्रेट एस्केप का दूसरा सीजन कुणाल एवं साइरस की मस्ती और रोमांच को प्रस्तुत करेगा।

धर्मशाला में अपनी यात्रा शुरू होने के बाद, जोड़ी ने हिमालय के केन्द्र में 650 किमी की यात्रा की। वे अंदरेता, रामपुर से लेकर रकचम घाटी गए और फिर काजा और स्पीति घाटी। कुणाल सबसे चुनौतीपूर्ण मार्गो में से एक पर ड्राइविंग करते नजर आएंगे वहीं साइरस को नैविगेशन करते देखा जाएगा।

इस शो के विषय में फॉक्स नेटवर्क्‍स ग्रुप, इंडिया प्रोडक्शंस की क्रिएटिव डायरेक्टर श्रुति टकुलिया ने कहा, “फॉक्स लाइफ खोजपरक और हलचल मचाने वाले प्रोग्रामिंग आइडियाज का घर है और ट्रैवेल शोज में यह हमेशा ट्रेंडसेटर रहा है। इसलिए, पूर्वोत्तर में पिता पुत्री की बाइक ट्रिप के बाद, हम ग्रेट एस्केप फ्रैंचाइजी के सीजन 2 के साथ वापसी कर रहे हैं। इस बार हम दर्शकों को खूबसूरत स्पीति घाटी के जरिये क्लासिक ब्वॉएज की रोड ट्रिप पर लेकर जाएंगे।”

अपने बचपन के दोस्त के साथ यात्रा करने के अपने अनुभव के बारे में कुणाल कपूर ने कहा, “इस ट्रिप ने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हम आखिर भारत में क्यों यात्रा नहीं करते। देश में बहुत कुछ देखने और एक्स्प्लोर करने के लिए है। इस सड़क यात्रा के दौरान, हम कुछ बेहद रोचक लोगों से मिले जैसे कि दुनिया में सबसे ऊंचे पोस्ट ऑफिस में पोस्ट मैन से, हिक्किम में दुनिया के सबसे ऊंचे गांवों में होम स्टे चलाने वाली एक महिला से। वहां के लोगों की जिंदगी इतनी सरल है कि मैं भी शहरी जिंदगी के भी ऐसा होने की आशा रखता हूं।”

अपने अनुभव के बारे में साइरस साहूकार ने कहा, “मैंने यह शो इसलिए स्वीकार किया क्योंकि इसमें यात्रा करनी थी और देश के सबसे आकर्षक हिस्से में जाकर वहां का अनुभव करना था।”

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