नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। जहाजरानी मंत्रालय माल ढुलाई के सड़क मार्ग को तटीय जल में स्थानांतरण को प्रोत्साहित करने के लिए सक्रिय रूप से विभिन्न उपायों पर विचार कर रहा है। इससे न केवल सड़कों पर भीड़ कम होगी, बल्कि ईंधन की खपत भी घटेगी। इसके साथ ही कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा।
यहां जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि तटीय शिपिंग के विकास में बाधा का एक प्रमुख कारण बंकर ईंधन पर लगने वाला सीमा एवं उत्पाद शुल्क है, जिससे ढुलाई की लागत बढ़ जाती है। यह मुद्दा राजस्व विभाग के 11 नवम्बर, 2014 को जारी अधिसूचना संख्या 31/2014 के साथ हल हो चुका है।
अधिसूचना में बंकर ईंधन, विशेषकर एक्जिम की ढुलाई और भारत में दो बंदरगाहों के बीच खाली कंटेनरों को लाने ले जाने वाले भारतीय ध्वज लगे पोतों में इस्तेमाल होने वाले आईएफओ 180 सीएसटी और आईएफओ सीएसटी पर लगने वाले सीमा एवं उत्पाद शुल्क में छूट दी गई है।
बयान के अनुसार, इस छूट को राजस्व विभाग ने 17 सितम्बर, 2015 को अधिसूचित कर मिश्रित एक्जिम, खाली और घरेलू कंटेनर ले जाने वाले भारतीय ध्वज लगे पोतों के लिए आगे बढ़ा दिया है।
बयान में कहा गया है कि तट के साथ ढुलाई में यह कर प्रोत्साहन भारतीय टनधारिता को बढ़ाने के साथ-साथ भारत में ढुलाई वाले क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा देने में एक लंबा रास्ता तय करेगा।
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