कोलकाता, 7 मार्च (आईएएनएस)। एक थाने में पुलिस को दी गई शिकायत में 15 वर्षीय एक किशोरी का नाम गलत दर्ज करने को अपमान मानते हुए पश्चिम बंगाल महिला आयोग ने पुलिस अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की सिफारिश की है।
हुआ यूं कि एक मकान मालिक के खिलाफ उसके किरायेदार ने शिकायत दर्ज कराई, जिसमें पुलिस ने उसकी नाबालिग बेटी का नाम ‘धर्शिता’ (जिसका बांग्ला में अर्थ होता है दुष्कर्म पीड़िता) लिख दिया। जब शिकायत की प्रति मकान मालिक को मिली तो अपनी बेटी का गलत नाम लिखा देख वह आग बबूला हो गए।
वह शिकायत दर्ज करने वाले कोलकाता पुलिस के उप निरीक्षक अतनु पाणिग्रही के पास नाम दुरुस्त कराने गए, लेकिन उप निरीक्षक ने नाम ठीक करने के बजाय उन्हें फटकार लगाई और कहा, “आपको तो खुश होना चाहिए कि आपकी बेटी को नया नाम मिला है।”
लेकिन लड़की के पिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने इस आशय की शिकायत राज्य महिला आयोग में दर्ज करा दी।
पाणिग्रही ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि शिकायत करने वाले ने जो नाम लिखाया वही दर्ज किया गया, उन्होंने अपने स्तर पर कुछ नहीं किया।
इस संबंध में महिला आयोग की अध्यक्ष सुनंदा मुखर्जी ने कहा कि सबसे खटकने वाली बात यह है कि पुलिस अधिकारी ने ढीठपना दिखाते हुए कानून का उल्लंघन किया। इसलिए उस अधिकारी के खिलाफ कोठोर कार्रवाई की जरूरत है, ताकि इस तरह की घटना फिर न हो।
उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए वह प्रदेश के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को भी लिखेंगी।
इस मामले में पुलिस उपायुक्त अखिलेश चतुर्वेदी ने कहा कि पुलिस इस मामले की छानबीन कर रही है।
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