कोलकाता, 13 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बाबूसोना सरकार (27) चाय बेचते हैं। लेकिन चायवाला होने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी तुलना किए जाने को वह दरकिनार कर देते हैं।
एक टेलीविजन चैनल द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या वह भी मोदी बनने वाले हैं, सरकार ने कहा, “मैं उनसे अपनी तुलना नहीं करता।”
सरकार नादिया जिले के राणाघाट उत्तर पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उम्मीदवार हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव में सबसे कम उम्र के प्रत्याशी सरकार राणाघाट से करीब नौ किलोमीटर दूर अरंघाट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर चाय की छोटी-सी दुकान चलाते हैं।
माकपा की एक वेबसाइट पर जारी रपट के मुताबिक, “बाबूसोना का वामपंथी राजनीति से 2006 में तब जुड़ाव हुआ, जब वह राणाघाट कॉलेज में स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया(एसएफआई) से जुड़े। कॉलेज के विद्यार्थियों की मांग उठाते-उठाते वह एक कार्यकर्ता के रूप में उभरे और धीरे-धीरे उन्होंने छात्र आंदोलन के नेतृत्व के खास गुण सीख लिए।”
बंगाली साहित्य में परास्नातक सरकार के बैंक खाते में 700 रुपये हैं और उनकी कुल संपत्ति 93,000 रुपये है। सरकार कहते हैं कि चुनाव प्रचार के लिए उन्हें समर्थकों से आर्थिक मदद मिली थी।
स्थानीय लोगों को गर्म चाय परोसते हुए उन्होंने कहा, “मैंने अपनी जेब से कुछ खर्च नहीं किया।”
उनकी मां अपने बेटे के विधायक बनने की संभावना को लेकर इस डर से कुछ नहीं कहना चाहती, कि ऐसा करने से उनकी इस उम्मीद को नजर लग जाएगी।
उनके पिता ने कहा, “अगर वह सफल हो जाएगा, तो मेरी जिंदगी सफल हो जाएगी।”
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव छह चरणों में हुआ है, जिसकी शुरुआत चार अप्रैल से हुई और पांच मई को अंतिम चरण का मतदान समाप्त हुआ। चुनाव परिणाम 19 मई को घोषित किए जाएंगे।
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