कोलकाता, 25 जून (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक विधायक ने पार्टी के विरुद्ध जाकर शनिवार को यहां कांग्रेस द्वारा महंगाई के खिलाफ आयोजित रैली में हिस्सा लिया।
कांग्रेस ने महंगाई और ‘ममता बनर्जी सरकार के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के राज में लोकतंत्र पर हमलों’ के खिलाफ आयोजित रैली में माकपा को भी न्योता दिया था।
लेकिन पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन के फैसले को लेकर मुंह की खाने के बाद माकपा की राज्य इकाई ने रैली में शामिल न होने का फैसला किया था।
माकपा की केंद्रीय समिति ने एक बयान में कहा था, “बंगाल में अपनाई गई चुनावी रणनीति कांग्रेस के साथ गठबंधन न करने के केंद्रीय समिति के फैसले के अनुरूप नहीं थी।”
भट्टाचार्य ने हालांकि रैली में शामिल होने को सही साबित करते हुए कहा कि वह जनादेश को नजरअंदाज नहीं कर सकते थे।
उन्होंने कहा, “दो महीने पहले हम लोगों के पास यह कहते हुए गए थे कि हमने गठबंधन किया है और उनसे गठबंधन को एक मौका देने का आग्रह किया था। दो करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने हमारे आग्रह को समर्थन दिया है। मैं जनादेश का अपमान नहीं कर सकता।”
भट्टाचार्य ने कहा, “जनादेश कहता है कि हमें (माकपा, कांग्रेस) सदन के भीतर और बाहर एकजुट होकर लड़ना चाहिए। यह रैली महंगाई के खिलाफ है जिसके लिए नरेंद्र मोदी सरकार और ममता बनर्जी सरकारें जिम्मेदार हैं।”
गठबंधन के भविष्य की भविष्य पर अटकलों के बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी आत्मविश्वास से भरे नजर आए।
चौधरी ने कहा, “गठबंधन का भविष्य उज्जवल है। जमीनी स्तर पर बना यह गठबंधन कांग्रेस और मार्क्सवादी कार्यकर्ताओं की इच्छा का परिणाम है और हम उनकी इच्छा को जारी रखेंगे।”
वहीं, माकपा विधायक दल के नेता सुजान चक्रवर्ती ने यह दावा करते हुए कि रैली में शामिल होना भट्टाचार्य का व्यक्तिगत फैसला था, कहा कि वह भट्टाचार्य से इस बारे में बात करेंगे।
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