नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने मंगलवार को कहा कि जवाहर लाल नेहरू (जेएनयू) विश्वविद्यालय को उसके अच्छे काम के लिए सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय का पुरस्कार मिला, न कि पिछले साल विवादों में रहने के लिए जिसमें ‘कुलपति को बंधक बना लिया गया था।’
लोकसभा में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2016 पर चर्चा के समापन के दौरान जावडेकर ने कहा, “हाल ही में जेएनयू को सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय का पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार उसे अपने वाइस चांसलर को बंधक बनाने के मुद्दे पर विवादों से घिरे रहने की वजह से नहीं बल्कि अच्छे कामों की वजह से मिला। विश्वविद्यालय के अच्छे कामों को हालांकि, विवादों की तुलना में अधिक तवज्जो नहीं दी गई।”
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से जेएनयू में खाली पड़े पदों के मामले पर आपत्ति जताई गई, जिसकी प्रतिक्रिया में जावडेकर ने यह बयान दिया।
जेएनयू में प्रोफेसरों के खाली पड़े पदों पर जोर देते हुए जावडेकर ने कहा, “विश्वविद्यालय में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग में 100 पद और विकलांग प्रोफेसरों के 25 पद काफी समय से खाली पड़े हैं।”
इस पर आपत्ति जताते हुए खड़गे ने कहा कि जेएनयू में ही नहीं बल्कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भी कई पद खाली पड़े हैं और इस पर मंत्री को प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
खड़गे ने कहा, “मैं जानता हूं कि आप (जावडेकर) केवल जेएनयू को ही क्यों उछाल रहे हैं।”
पिछले साल विवादों से घिरे रहने वाले जेएनयू को देश के वार्षिक ‘विजिटर्स अवार्ड्स’ से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार देश के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय को दिया जाता है।
जेएनयू में विवाद की शुरूआत छात्र नजीब अहमद के लापता होने के बाद हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय के छात्रों के विरोध प्रदर्शन के कारण कुलपति एम. जगदीश कुमार अपने कार्यालय में बंद हो गए थे।
इससे पहले, विश्वविद्यालय के तीन छात्रों को परिसर में एक घटना के सिलसिले में देशद्रोह के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। उन पर कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगाने के आरोप लगे।
लोकसभा में सदस्यों के सवालों के जवाब में जावडेकर ने कहा कि विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों का मुद्दा गंभीर बात है और इसके कई कारण हैं।
जावडेकर ने कहा, “केंद्रीय विश्वविद्यालयों, राज्य विश्वविद्यालयों और निजी विश्वविद्यालयों में कई पद खाली पड़े हैं। हम एक ऐसा मंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं जहां सभी रिक्त पद हमारी वेबसाइट पर दिख सकें।”
मंत्री ने कहा कि इन रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार को एक ऐसे वातावरण का निर्माण करने की जरूरत है, जहां छात्र, शिक्षक और प्रोफेसर बनने को प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा, “हमें छात्रों में इस विषय पर रुचि जगानी होगी, ताकि वह इस पेशे की तरफ झुकें।”
जावडेकर ने कहा कि वह जिस भी विश्वविद्यालय का दौरा करते हैं, वहां के छात्रों से हमेशा यहीं पूछते हैं कि उनमें से कितने शिक्षक बनना चाहते हैं और कितने प्रोफेसर?
उन्होंने कहा, “हाल ही में मैंने आईआईटी का दौरा किया, जहां मैंने छात्रों से यही सवाल किया। अधिकतर छात्रों ने इसके लिए हामी भरी और इससे मुझे बेहद खुशी हुई।”
लोकसभा में इस दौरान, जावडेकर ने परिसर में छात्रों के आत्महत्याओं की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि परिसर में आत्महत्या का एक भी मामला दुर्भाग्यपूर्ण है।
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